पाक के निशाने पर देश के ऑयल प्लांट्स

नई दिल्ली(18 अक्टूबर):  भारत की ऑइल कंपनियां पाकिस्तान के निशाने पर हैं। खुफिया एजेंसी ने पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्रालय को देश के सभी ऊर्जा प्रतिष्ठानों की सुरक्षा बढ़ाने की सलाह दी है। एक पाकिस्तानी जासूस के ऑइल इंडस्ट्री अधिकारी से सूचनाएं हासिल करने वाली फोन कॉल सुनने के बाद खुफिया एजेंसी ने यह सलाह दी है।

-उरी में 18 सितंबर के आतंकवादी हमले और उसके बाद भारतीय सेना द्वारा पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में नियंत्रण रेखा के पार आतंकवादी शिविरों पर की गई सर्जिकल स्ट्राइक के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा है। इसे देखते हुए भारत में सुरक्षा बल और खुफिया एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। 

- इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) ने हाल ही में एक पाकिस्तानी जासूस की बात सुनी थी। वह खुद को रॉ का अधिकारी बताकर राजस्थान के एक ऑइल पाइपलाइन मैनेज करने वाले अधिकारी से फोन पर जानकारियां हासिल करने की कोशिश कर रहा था। सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तानी जासूस ने पाइपलाइन से जुड़ी कई सूचनाएं हासिल कीं।

- IB ने आगाह किया है कि कई पाकिस्तानी जासूस अपने देश और भारत से गलत नाम से फोन करके देश के तेल प्रतिष्ठानों के बारे में जानकारियां जुटा रहे हैं। उसने ऑइल इंडस्ट्री में काम करने वाले अधिकारियों को इस बारे में आगाह करने के लिए कहा है, ताकि पाकिस्तानी जासूस ऐसी जानकारियां हासिल न कर पाएं। ऑइल पाइपलाइन को बम से उड़ाने या रिफाइनरी को नुकसान पहुंचाए जाने से देश के कुछ इलाकों में ऑइल-गैस की कमी हो सकती है। ऐसे हमलों में जान-माल और बुनियादी व्यवस्थाओं को नुकसान पहुंचने का भी जोखिम है।

- राजस्थान, गुजरात और पंजाब की सीमा पाकिस्तान से लगती है। इन राज्यों में काफी पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस से जुड़ी काफी संपत्ति है, जिसे दुश्मन देश से हमेशा ही खतरा रहा है। देश और दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी- रिलायंस इंडस्ट्रीज का 6 करोड़ सालाना क्षमता वाला रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स और एस्सार का 2 करोड़ वाला प्लांट गुजरात में है। वहीं, एस्सार की 90 लाख टन क्षमता वाली रिफाइनरी पंजाब में है। देश की कुल रिफाइनिंग क्षमता में इन 3 प्लांट्स का योगदान 40 फीसदी है। सबसे बड़ी ऑइल फील्ड राजस्थान के बाड़मेर में है। इसका देश के कुल तेल उत्पादन में 25 फीसद योगदान है। देश में ज्यादातर ऑइल रिफाइनरी की सुरक्षा सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्यॉरिटी फोर्स (CISF) करती है। पाइपलाइन के लिए खतरा ज्यादा है क्योंकि उनकी निगरानी हमेशा नहीं की जाती।