दुश्मन देशों की अब नहीं खैर, भारत को मिला ये खास हथियार

Image credit: Google

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (13 दिसंबर): भारत की सामरिक शक्ति में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। अत्याधुनिक संसाधनों से लैश डीप सबमर्जेन्स रेस्क्यू व्हिकल यानी DSRV भारतीय नौसेना के बेडे में शामिल हो गया है। अबतक ये व्हिकल इन देशों के पास था जिनके पास खुद की सबमरीन रेस्क्यू  की सुविधा थी। ये सुविधा अबतक अमेरिका, रूस, जर्मनी, फ्रांस चीन, इंग्लैंड और जर्मनी जैसे देशों के पास ही था।  बुधवार को मुंबई के नेवल डॉकयार्ड में आयोजित समारोह में पश्चिमी नेवल कमांड के प्रमुख गिरीश लूथरा सहित नेवी के अधिकारी मौजूद थे।

Image credit: Google

आपको बाता दें कि भारत सरकार ने ब्रिटेनी की कंपनी जेम्स फिसर डिफेंस से 2016 दो हजार करोड़ रूपए में दो DSRV खरीदा है। इसमें से एक DSRV को भारतीय नौसेना में शामिल किया गया जनवरी अंत तक दूसरी DSRV भारत के पास आ जाएगी।  इसे विशाखापटनम नेवी कमांड को दिया जाएगा। बताया जा रहा है कि 25 साल तक  ब्रिटेनी की कंपनी जेम्स फिसर डिफेंस इसका मेंटेंनेंस करेगा। यानी DSRV में किसी तरह की गड़बडी आती है तो उसका मेंटेंनेंस भी कंपनी ही करेगी।

Image credit: Google

इस सबमरीन में 3 क्रू मेंबर होंगे। इसके अलावा एक बार में इसमें 14 लोगों को रेस्क्यू करके लाया जा सकता है। इसकी खासियत यह भी है कि इसे एक जगह से दूसरी जगह शिप से ले जाया जा सकता है। साथ ही जरूरत पडने पर इसे एयरलिफ्ट भी किया जा सकता है। इसका वजन 33 टन है। नौसेना के पश्चिमी कमान ने इसका परीक्षण किया। परीक्षण के दौरान रेस्क्यू व्हिकल ने समुद्र की 650 मीटर की गहराई तक गोता लगाया।  इस अवसर पर वाइस एडमिरल गिरिश लूथरा ने डीएसआरवी की खूबियों के बारे में बताया। कैप्टन अरुण जॉर्ज ने कहा, 'इस बेड़े को शामिल करने के लिए कड़ा परीक्षण किया गया है। परीक्षण में 60 से अधिक दिन लगे हैं। इनमें 32 दिन समुद्र में रहे। इस पोत के जरिए नौसेना के अधिकारी मुसीबत में फंसी पनडुब्बी का चित्र देख सकेंगे और उसकी वास्तविक स्थिति की समीक्षा कर सकेंगे।' उन्होंने बताया कि यह पोत एक गोते में 14 लोगों को बचा सकता है। परीक्षण के दौरान, डीएसआरवी 650 मीटर तक नीचे गया, जो एक रेकॉर्ड है। इसे एयरक्राफ्ट के जरिए देश-विदेश में कहीं भी ले सकते हैं। फिलहाल इस सबमरीन को शिपिंग कॉरपोरेशन की शिप पर रखा गया है। इन दोनों  DSRV को रखने के लिए खास तरह के दो जहाज बनाने का आर्डर दिया गया है।