'युवाओं के IS में शामिल होने के पीछे पाकिस्तान'

नई दिल्ली(27 सितंबर): दुनिया के सबसे खूंखार आतंकी संगठनों में से एक इस्लामिक स्टेट से प्रेरित मॉड्यूल में शामिल होने के लिए 16 युवाओं के खिलाफ नैशनल इनवेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) की ओर से दायर की गई चार्जशीट में पहली बार तीन ऐसी घटनाओं का जिक्र किया गया है जिनमें कथित तौर पर ये संदिग्ध पाकिस्तान की ओर से चलाई जा रही वेबसाइट पर जाने और आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मौलाना मसूद अजहर की ओर से लिखी सामग्री को पढ़ने के बाद आतंकवाद की ओर गए थे।

- इन संदिग्धों को इनके प्रमुख मुदाबिर मुश्ताक शेख के साथ एनआईए ने इंटेलिजेंस एजेंसियों की मदद से जनवरी में पकड़ा था। ऐसा आरोप है कि इन सभी को इंडियन मुजाहिद्दीन के पूर्व कमांडर शफी अरमार उर्फ यूसुफ-अल-हिंदी ने कट्टरवादी बनाया था। युसुफ के अभी सीरिया में रहने का संदेह है। वह इस्लामिक स्टेट के मुखिया अबू बकर अल-बगदादी का वफादार माना जाता है।

- एनआईए के अनुसार, संदिग्धों का यह गुट इस्लामिक स्टेट से प्रेरित था और इन्होंने भारत में जुनूद-अल-खलीफा-ए-हिंद नाम का संगठन बनाया था।

- एनआईए ने अपनी 87 पेज की चार्जशीट में बताया है कि आरोपियों में से एक नफीस खान उर्फ अबू जरार हिंसक जेहाद का समर्थक है। चार्जशीट के अनुसार, 'उसने 'दावत-ए-हक' (पाकिस्तान में मौजूद एक गैर-राजनीतिक इस्लामिक संगठन) की वेबसाइट पर जाना शुरू किया था। वह वेबसाइट पर पोस्ट किए जाने वाले विडियो और फोटो को बहुत पसंद करता था। वेबसाइट पर हदीथ की तस्वीरों को वह काफी ध्यान से देखता था। इसके बाद नफीस ने 'नफीस खान' नाम से एक फेसबुक अकाउंट खोला था।' एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि भारत आतंकवाद का एक्सपोर्ट करने में पाकिस्तान की भूमिका का खुलासा कर रहा है। उनका कहना था, 'इस मामले में भी यह स्पष्ट है कि पाकिस्तान से नियंत्रित किए जाने वाले आतंकवादी संगठन/वेबसाइट्स भारत के कुछ युवाओं को प्रभावित कर उन्हें कट्टरवादी बना रहे हैं।'

- इसी तरह मध्य प्रदेश के निवासी और देवबंद में दारुल उलूम का एक छात्र अजहर खान को एनआईए ने भोपाल से गिरफ्तार किया था। अजहर माओवादियों से प्रभावित था और उसने गिरफ्तार होने से पहले छत्तीसगढ़ में माओवादियों से संपर्क करने की कोशिश की थी। चार्जशीट में बताया गया है, 'आरोपी दुनिया में हो रही घटनाओं की जानकारी के लिए समाचार पत्र पढ़ने में दिलचस्पी रखता था क्योंकि मदरसे में वह खुद को दुनिया से कटा हुआ महसूस करता था। 2014 में उसने अल-कलाम नाम का एक समाचार पत्र पढ़ने के लिए देवबंद में आई-नेट नाम के एक साइबर कैफे में जाना शुरू किया था।' यह समाचार पत्र पाकिस्तान में प्रकाशित होता है और इसे आतंकवादी संगठन जेईएम की प्रॉपेगैंडा वेबसाइट बताया जाता है। भारत में इस वर्ष पठानकोट और उड़ी में हुए हमलों के पीछे इसी आतंकवादी संगठन का हाथ होने का शक है।

- एक अन्य संदिग्ध आशिक अहमद को हुगली से गिरफ्तार किया गया था, लेकिन बाद में वह गवाह बनने के लिए राजी हो गया। उसने फेसबुक पर एक अकाउंट बनाकर बाबरी मस्जिद को ढहाने और दादरी की घटना पर चर्चाएं की थी। अहमद जेहाद को लेकर अजहर के भाषणों से भी प्रेरित था। चार्जशीट में बताया गया है कि अहमद और उसके दोस्तों की भारत में हिंदू नेताओं को निशाना बनाने की भी योजना थी।