भारतीय सुरक्षा बलों को मिलेगें 'दिव्यचक्षु'

नई दिल्ली (23 मार्च): डीआडीओ ने एक ऐसा रडार विकसित किया है, जिससे दीवारों के आर-पार भी देखा जा सकेगा। इससे सुरक्षा बलों को आतंकी हमलों और बंधकों को छुड़ाने में काफी मदद मिलेगी। इस रडार का नाम 'दिव्यचक्षु' रखा गया है। इसे डीआरडीओ के बेंगलुरु स्थित रडार विकास अधिष्ठान (एलडीआरई) ने विकसित किया और इसका परीक्षण जारी है।

इस परियोजना से जुड़े एक वैज्ञानिक ने बताया कि यह रडार 20 मीटर दूर से दीवारों के आर-पार देख सकता है। यह थर्मल सिग्नेचर को पकड़ता है, जिससे कमरे में हो रही गतिविधियों को स्पष्ट रूप से दिखा सकता है। वैज्ञानिक ने कहा, बंधक स्थितियों के दौरान इस रडार से कमरे में कितने लोग हैं, इसका पता लगाया जा सकेगा।

विशेषज्ञों के मुताबिक, कमरे में मौजूद लोगों की गतिविधियों को देखकर आसानी से पता लगाया जा सकता है कि बंधक कौन है और आतंकवादी कौन है।  इस रडार को काफी कम लागत में देश में ही विकसित किया गया है। इसकी कीमत 35 लाख रुपये के आसपास है, जबकि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में ऐसे रडारों की कीमत 2 करोड़ रुपये के आसपास होती है। इसके अलावा इस उपकरण को हल्का बनाने की कोशिश जारी है। फिलहाल इसका वजन 6-7 किलोग्राम के आसपास है।