US में भारत का बोलबाला, 10 लाख के करीब पहुंची 'भारतीय' वैज्ञानिकों, इंजीनियर्स की संख्या

नई दिल्ली (16 जनवरी): अमेरिका में भारत का बोलबाला बरकरार बना हुआ है। इसका एक अहम कारण है कि अमेरिका में भारतीय मूल के वैज्ञानिकों और इंजीनियर्स की संख्या में साल 2003 और 2013 के बीच 85 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। 'नेशनल साइंस फाउंडेशन' की एक रिपोर्ट में इस बात की जानकारी दी गई है। यह संस्था अमेरिका में की जाने वाली रीसर्च के लिए फंडिंग करती है। साथ ही वैज्ञानिकों और टेक्नॉलॉजिस्ट्स में होने वाले डेमोग्राफिक चेंज का भी आकलन करती है।

अंग्रेजी अखबार 'द हिंदू' की रिपोर्ट के मुताबिक,  फाउंडेशन के पास उपलब्ध नवीनतम आंकड़े साल 2013 के हैं। इसी साल अमेरिका में भारतीय मूल के वैज्ञानिकों और इंजीनियर्स की संख्या 9,50,000 रही। भारतीय मूल के वैज्ञानिकों की संख्या में हुई बढ़ोतरी अन्य देशों की तुलना में काफी ज्यादा है। जहां फिलीपीन्स के प्रवासियों की संख्या में 50 फीसदी और चीन के प्रवासियों की संख्या में 34 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। इस तरह इन दोनों देशों में क्रमशः 4,65,000 और 4,38,000 वर्कर्स का योगदान किया। साल 2003 में अमेरिका के कुल रीसर्च वर्कफोर्स में भारतीय मूल के रीसर्चर्स का प्रतिशत 2.5 फीसदी था, वहीं यह साल 2013 मे 3.3 फीसदी हो गया है।

''यूएस साइंस एंड इंजीनियरिंग वर्कफोर्स: एजुकेशन एंड इंप्लॉयमेंट करैक्टरीस्टिक्स इन 2013'' रिपोर्ट में बताया गया है, कि  इन 'प्रवासियों' में नैचुरलाइज्ज नागरिक, स्थाई निवासी और अस्थाई वीज़ा होल्डर्स भी शामिल हैं। अमेरिकी प्रोफेशनल्स में भारतीय लगातार ऐसे प्रोफेशनल्स के सबसे बड़े साधन बने हुए हैं। जिनकी संख्या अमेरिका में लगातार बढ़ रही है। अमेरिका में रहने वाले वैज्ञानिकों और इंजीनियर्स की संख्या 2.16 करोड़ से 2.9 करोड़ हो गई है। प्रवासी वैज्ञानिकों और इंजीनियर्स में साल 2013 में स्टडी के क्षेत्रों में इंजीनियरिंग, कम्प्यूटर, मैथमैटिकल साइंसेस के साथ सोशल और संबंधित साइंसेस रहे।