अमेरिका को पीछे छोड़ 2040 तक भारत बनेगा दुनिया की दूसरी बड़ी अर्थव्यवस्था: रिपोर्ट

नई दिल्ली ( 7 फरवरी): एक रिपोर्ट में अनुमान लगाया है कि लगभग 23 साल बाद ग्लोबल इकोनॉमी में बड़ा बदलाव सामने आ सकता है। दुनिया की सबसे बड़ी ऑडिट एजेंसीज में से एक प्राइस वाटरहाउस कूपर्स (पीडब्ल्यूसी) के मुताबिक, भारत 2040 में अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। रिपोर्ट में परचेजिंग पावर पैरिटी (पीपीपी) के बेस पर यह अनुमान जाहिर किया गया है।पीडब्ल्यूसी के मुताबिक ई7 कंट्रीज जिनमें ब्राजील, चीन, भारत, इंडोनेशिया, मेक्सिको, रूस और तुर्की शामिल हैं, अगले 34 साल तक 3.5 फीसदी एवरेज सालाना ग्रोथ से आगे बढ़ेंगे। इसके उलट एडवांस्ड जी7 कंट्रीज की ग्रोथ रेट 1.6 फीसदी रहेगी, जिसमें कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमेरिका आते हैं।पीडब्ल्यूसी के मुताबिक, ‘वास्तव में पीपीपी के लिहाज से चीन पहले ही अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है।  भारत इस लिस्ट में तीसरे नंबर पर है। इस ऑडिट एजेंसी के मुताबिक, भारत 2040 तक अमेरिका को पीछे छोड़ सकता है।पीडब्ल्यूसी का मानना है कि इस दौरान वियतनाम, भारत और बांग्लादेश दुनिया में सबसे ज्यादा तेजी से उभरती तीन अर्थव्यवस्था बन जाएंगी। पीडब्ल्यूसी के चीफ इकोनॉमिस्ट और रिपोर्ट के को-ऑथर जॉन हॉक्सवर्थ ने कहा, ‘हम इस दौरान ग्लोबल इकोनॉमिक पावर को एडवांस्ड इकोनॉमीज से एशिया की इमर्जिंग इकोनॉमी की तरफ शिफ्ट होते देखेंगे।2050 तक  दुनिया के जीडीपी में ई7 देशों की हिस्सेदारी लगभग 50 फीसदी तक पहुंच सकती है, जबकि जी7 देशों की हिस्सेदारी महज 20 फीसदी पर सिमट सकती है।’पीडब्ल्यूसी इंडिया के लीडर (एडवायजरी) दीपांकर सानवाका ने कहा, ‘ग्लोबल इकोनॉमिक पावर का इमर्जिंग इकोनॉमीज की तरफ शिफ्ट होना खासा अहम है और इसका झुकाव साफ तौर पर भारत के पक्ष में है।’हालांकि ग्रोथ की इन संभावनाओं को देखते हुए इमर्जिंग मार्केट्स की सरकारों को मैक्रोइकोनॉमिक स्टैब्लिटी बढ़ाने, नैचुरल रिसोर्स पर डिपेंडेंसी कम करने के लिए स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स लाने होंगे।  साथ ही उन्हें ज्यादा असरदार पॉलिटिकल और लीगल इंस्टीट्यूशंस डेवलप करने होंगे।