सबसे अमीर और ताकतवर देश पर बल्ले और गेंद की नजर

नई दिल्ली (27 अगस्त): क्रिकेट में हिंदुस्तान की जान बसती है। समूचे एशियाई देशों में सबसे पॉपुलर खेल है क्रिकेट, लेकिन एक कसक हर वक्त रहती है कि इसमें वो ताकतवर मुल्क हिस्सा नहीं लेते जिनकी पूरी दुनिया में धाक है। तो अब क्रिकेट की धाक के आगे दुनिया का सबसे ताकतवर मुल्क भी झुक गया है। अमेरिका में भी क्रिकेट के जुनून की शुरुआत हो चुकी है। फुटबॉल खेलने वाला अमेरिका आज क्रिकेट के रंग में दिखेगा।

अमेरिका एक ऐसा देश जहां सबसे फेवरेट स्पोर्टस अमेरिकन फुटबॉल है, जिसे 38 फीसदी लोग पसंद करते हैं। लेकिन अमेरिका में क्रिकेट की संभावना भी कम नहीं है। 2011 में जब भारतीय टीम वर्ल्ड चैंपियन बनीं तो फिर अमेरिका के अलग-अलग शहरों में हिंदुस्तान जैसा नजारा देखने को मिल रहा था। अमेरिका में क्रिकेट की इस लोकप्रियता पर ICC की नजर भी उसी समय पड़ गई थी। वर्ल्ड क्रिकेट के थिंक टैंक ने अमेरिकी मार्केट में क्रिकेट को भूनाने का मन बना लिया और साथ में वर्ल्ड क्रिकेट के स्टार्स खिलाड़ी भी तैयार नजर आ रहे हैं।

इसकी तरफ पहला कदम बढ़ा पिछले साल नवंबर में जब पहली बार अमेरिका में ऑल स्टार टी-20 टूर्नामेंट का आयोजन किया गया। सचिन, सौरव, शेन वॉर्न और ब्रायन लारा सरीखे स्टार्स पहली बार अमेरिकी मैदान पर खेलने उतरने। क्रिकेट के प्रति इस झुकाव को भांपने के बाद इस साल कैरेबियाई प्रीमियर लीग के 6 मैच अमेरिका के फ्लोरिडा में कराए गए। यहां भी क्रिकेट का वही रंग दिखाई दिया जो हिंदुस्तान, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के मैदान पर दिखाई देता है।

अमेरिकी फैन्स के बीच क्रिकेट के बढ़ते क्रेज को देखते हुए बीसीसीआई ने भी पहल की और वेस्टइंडीज के खिलाफ 2 टी-20 मैच अमेरिका में कराने का फैसला किया। वैसे भी भारतीय टीम के साथ किसी भी सीरीज को सफलता की गारंटी माना जाता है। उम्मीद की जा रही है कि अमेरिका में होने वाले 27 और 28 अगस्त को पहले इंटरनेशल मैच से अमेरिका वर्ल्ड क्रिकेट में अपनी नई पहचान कायम कर सकता है।

वैसे तो अमेरिका भी ICC में 39 वें नंबर का एसोसिएट मेंबर है। अमेरिका की क्रिकेट टीम पिछले 15-16 से क्रिकेट भी खेलती आ रही है। लेकिन इंटरनेशल क्रिकेट में अमेरिका वो ताकत नहीं दिखा पाया जो बाकी खेलों में दिखाया है। एक रिसर्च के मुताबिक अमेरिकी लोग उस खेल को ज्यादा पसंद करते हैं जिसमें समय कम लगता है, टी-20 आने के बाद ये माना जा रहा है कि अमेरिकी लोगों का रुझान भी क्रिकेट की तरफ बढ़ सकता है। क्योंकि टी-20 का फैसला 3.30 घंटे में हो जाता है।

वैसे देखा जाए तो वेस्टइंडीज के खिलाफ टीम इंडिया का दो टी-20 मैच इसी की तरफ पहला कदम है। उम्मीद है कि अमेरिकी बाजार के साथ-साथ अमेरिकी फैन्स पर भी आने वाले समय में क्रिकेट का बुखार चढ़ेगा और अमेरिका में इस तरह की तस्वीरें आम होगी।