मुख्य न्यायाधीश गोगोई ने किया आगाह, कहा- संविधान के तहत नहीं चले तो भुगतने होंगे गंभीर परिणाम

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (26 नवंबर): आज 26 नवंबर है। आज के ही दिन 26 नवंबर 1949 को देश में संविधान लागू किया गया था। लिहाजा हर साल 26 नवंबर को संविधान दिवस के तौर पर मनाया जाता है।  इस दिन डॉ. भीमराव अंबेडकर को याद किया जाता है। उन्होंने भारतीय संविधान के रूप में दुनिया का सबसे बड़ा संविधान तैयार किया। इस मौके पर दिल्ली के विज्ञान भवन में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में देश के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई बतौर मुख्य गेस्ट शामिल हुए। इस मौके पर मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने संविधान के लागू होने की तारीख याद करते हुए कहा कि  यह गर्व की बात है कि सात दशकों में हमारा संविधान महान शक्ति के रूप में स्थापित हुआ। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई बतौर ने कहा कि जब संविधान को लागू किया गया था, तो हमारे संविधान की आलोचना की गई थी। सर इवर जेनिंग्स ने इसे बहुत बड़ा और कठोर कहा था, लेकिन समय ने इस आलोचना को कमजोर साबित कर दिया। सात दशकों से हमारा संविधान महान शक्ति के रूप में बना हुआ है। उन्होंने कहा कि हमारा संविधान हमारा मार्गदर्शन करता है, मुश्किल के समय में भी संविधान ही रास्ता दिखाता है। हमारे हित में यही है कि हम संविधान की सलाह के अनुसार ही चलें। यह हमारे हित में है कि हम संविधान के दायरे में रहते हुए उपर्युक्त सलाह लें। यदि हम ऐसा नहीं करते हैं तो हमें गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे।

इससे पहले संविधान दिवस की पूर्व संध्या पर भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने उप राष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को डिनर पर आमंत्रित किया। बिमस्टेक (बे ऑफ बंगाल इनेशिएटिव फार मल्टी सेक्टोरल टेक्नीकल एंड इक्नॉमिक) में शामिल होने आए बांग्लादेश, म्यांमार, थाइलैंड, नेपाल और भूटान के मुख्य न्यायाधीश और जज भी इस डिनर प्रोग्राम में शामिल हुए थे।

आपको बता दें कि भारतीय संविधान दुनिया के सभी संविधानों को बारीकी से परखने के बाद बनाया गया। इसे विश्व का सबसे बड़ा संविधान माना जाता है, जिसमें 448 अनुच्छेद, 12 अनुसूचियां और 94 संशोधन शामिल हैं। यह हस्तलिखित संविधान है जिसमें 48 आर्टिकल हैं। इसे तैयार करने में 2 साल 11 महीने और 17 दिन का समय लगा था।