लाहौर पहुंच गया था सेना का ये जवान, थाने पर फहराया था तिरंगा

नई दिल्ली(2 अक्टूबर): पीओके में घुसकर 30 से 40 आतंकी को मारकर देश को जाबांजों की जमकर प्रशंसा हो रही है। इन जाबांजों ने एक बार फिर 1965 में हुए भारत-पाक कश्मीर युद्ध की याद को ताजा कर दिया है।

- ठीक 51 साल पहले 1965 में राजस्थान पाली के पराक्रमी ब्रिगेडियर हरिसिंह ने भारतीय सेना का नेतृत्व करते हुए लाहौर के पुलिस थाने पर तिरंगा फहरा दिया था। 

- पाली के गलथनी गांव के ब्रिगेडियर हरिसिंह देवड़ा के नेतृत्व में भारतीय सेना ने पाकिस्तान में लाहौर के बर्की पुलिस थाने पर तिरंगा फहराकर पाली का नाम पूरे देश में रोशन कर दिया था।

- हरिसिंह की कैवलरी पाक सैनिकों के आत्मसमर्पण के बाद ही वहां से वापस अपने वतन में लौटी थी।

- देवड़ा का सैन्य दस्ता लाहौर शहर से मात्र छह मील दूर रहा था। देवड़ा उस समय 18 कैवेलरी के कमांडर थे। बाद में वे ब्रिगेडियर बने और 1973 में उन्हें राष्ट्रपति वीवी गिरि ने अति विशिष्ट सेवा मेडल देकर पुरस्कृत भी किया।

- 1965 में भारत और पाकिस्‍तान के बीच हुए युद्ध को 'कश्‍मीर युद्ध' का नाम भी दिया गया था। यह युद्ध संयुक्त राष्ट्र के दखल के बाद 22 सितंबर 1965 को खत्‍म हुआ था।

- संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद ने सर्वसम्मति से एक प्रस्‍ताव पारित किया किया, जिसमें दोनों देशों को बिना शर्त के युद्धविराम करना था।

- हरिसिंह ने अपने सैन्य जीवन की डायरी भी लिखी थी। उनके बेटे जयेंद्रसिंह गलथणी के अनुसार युद्ध की डायरी में जिक्र किया है कि वे उन दिनों सियालकोट में एक मुस्लिम टुकड़ी का नेतृत्व कर रहे थे।

- उनकी टुकड़ी खेमकरण सेक्टर के बर्की पुलिस स्टेशन को फतह कर इच्छोगिल नहर तक पहुंची तो एक वायरलेस मैसेज से पता चला कि वे पाकिस्तान में बहुत आगे तक पहुंच चुके हैं और दोनों ओर से पाक सेना से घिर चुके हैं।

- हालात देखते हुए उनकी कैवलरी ने सूबेदार अयूब खां (जो बाद में सांसद बने) के सहयोग से आर्टिलरी फायर खोल दिया।

- करो या मरो की स्थिति में लेफ्टिनेंट कर्नल देवड़ा ने खुली रोवर जीप में सवार होकर टुकड़ी का हौसला बढ़ाया। वहां 18 कैवेलरी के दस्ते ने 13 टैंक नष्ट किए।

- इच्छोगिल नहर के पास पहुंचने वाले पहले भारतीय सैन्य अधिकारी देवड़ा ने बर्की पुलिस स्टेशन लाहौर को अपने कब्जे में कर तिरंगा फहराया। इसी के चलते उन्हें गैलेंट्री प्रमोशन दिया।