इंडियन आर्मी की साइज घटाने की तैयारी, नॉन कॉम्बैट जॉब्स में हो सकती है कटौती

नई दिल्ली(9 मई): इंडियन आर्मी अपने नॉन कॉम्बैट सेक्शन में स्टाफ कम करने जा रही है। आर्मी चीफ जनरल दलबीर सिंह सुहाग ने इसे स्टडी करने के ऑर्डर दिए हैं। इसकी वजह खर्च कम करना और आर्मी को सही शेप में लाना है।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, आर्मी चीफ सुहाग ने एक सीनियर मोस्ट जनरल को अगस्त के आखिरी तक रिकमंडेशन देने को कहा है।इसमें कहा गया है कि आर्मी में कॉम्बैट और नॉन कॉम्बैट जवानों का रेश्यो सही होना चाहिए। 

स्टडी में सबसे ज्यादा फोकस इस बात पर रहेगा कि लॉजिस्टिक सपोर्ट को कम करके भी उसका बेहतर इस्तेमाल कॉम्बैट फोर्स के लिए कैसे किया जा सकता है। इसके अलावा मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम की भी जांच की जाएगी। कम्युनिकेशन स्किल्स पर फोकस ज्यादा किया जाएगा।  हथियारों की जांच और सिविलियन वर्क फोर्स को कम करना भी इस स्टडी का अहम हिस्सा होगा।

जानकारी के मुताबिक, आर्मी स्टाफ कम करने की कवायद का मकसद खर्च कम करके काबिलियत बढ़ाना है। माना जा रहा है कि इस बारे में रोडमैप तीन महीने में तैयार कर लिया जाएगा।  हालांकि, यह काम आसान नहीं है। रिटायर्ड जनरल फिलिप कैम्पोस का कहना है कि कॉम्बैट और नॉन कॉम्बैट स्टाफ के रेश्यो को समझना और सेट करना आसान काम नहीं है। उनके मुताबिक, आर्मी की एक डिवीजन में 14 हजार जवान होते हैं और उन्हें सपोर्ट देने के लिए 3 हजार लॉजिस्टक स्टाफ रहता है। इंडियन आर्मी में इस वक्त 10 लाख 2 हजार स्टाफ है। खास बात ये है कि 49, 631 अफसर रखने की मंजूरी है, लेकिन फिलहाल 9,106 अफसर कम हैं। कैम्पोस कहते हैं कि अफसरों के रोल को ठीक किया जाए तो रेश्यो बेहतर किया जा सकता है।

पांच महीने पहले ही नरेंद्र मोदी ने कहा था कि मॉडर्नाइजेशन और आर्मी की तादाद को एक साथ बढ़ाना मुश्किल काम है। पीएम ने ये भी इशारा किया था कि टेक्नोलॉजी पर ज्यादा खर्च करके आर्मी की एफिशियन्सी बढ़ाई जाए। 2005 से 2013 के बीच आर्मी में 14 हजार नौकरियां पहले ही कम की जा चुकी हैं। इंडियन आर्मी दुनिया में दूसरे नंबर की सबसे बड़ी आर्मी है। सरकार ने फरवरी में संसद को बताया था कि भारत डिफेंस पर 2.58 लाख करोड़ रुपए खर्च करेगा। 2016-17 के लिए किए गए इस अलॉटमेंट में पिछले साल की तुलना में 9.7% की बढ़ोत्तरी की गई है