26 जनवरी पर 26 साल बाद इनकी होगी परेड में वापसी

नई दिल्ली(16 जनवरी):इस बार के गणतंत्र दिवस पर होने वाली सालाना परेड में एख ऐसी चीज देखने को मिलेगी जो पिछले 26 साल से नहीं देखी गई। राष्ट्रपति के सुरक्षाकर्मियों के शानदार और शाही दिखने वाले घोड़ों और बीएसएफ के ऊंटों के अलावा इस साल की परेड में एक और मेहमान सबके आकर्षण का केंद्र बनेगा। इस साल 26 जनवरी को राजपथ पर होने वाली परेड में सेना के प्रशिक्षित कुत्ते भी मार्च करेंगे। 

अधिकारियों ने बताया कि इस मौके के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित जर्मन शेफर्ड और लैब्रडोर प्रजाति के 36 कुत्तों को चुना गया है। इनके साथ उनके प्रशिक्षक भी मार्च में शामिल होंगे। 36 कुत्ते और उनके 36 प्रशिक्षकों की यह जोड़ी आर्मी डॉग दस्ते में शामिल होकर परेड करेगी। 26 साल बाद गणतंत्र दिवस की परेड में कुत्तों को फिर से शामिल करने का फैसला किया गया है। 

अधिकारी ने बताया कुत्ते सिर्फ मार्चपास्ट करेंगे, कोई करतब नहीं दिखाएंगे। सेना के पास फिलहाल 1,200 खोजी कुत्ते हैं। इनका इस्तेमाल मुख्यतौर पर सुरक्षा, ट्रैकिंग और विस्फोटक पदार्थों व बारूदी सुरंगों को खोजने में किया जाता है। जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर के राज्यों में इनका खासतौर पर इस्तेमाल होता है। इन कुत्तों को मेरठ स्थित आरवीएस सेंटर में प्रशिक्षित किया जाता है। सेना के कुत्ते व उनके प्रशिक्षक एक शौर्य चक्र, 6 सेना पदक, 142 सीओएएस प्रशस्ति पत्र, 6 वीसीओएएस प्रशस्ति पत्र और 448 जोओसी प्रशस्ति पत्र जीत चुके हैं। 

भाग लेने वाले 36 कुत्तों में से कुछ की कहानी बड़ी रोचक है। एक साल लैब्रडोर प्रजाति का कुत्ता मानसी अपने प्रशिक्षक बशीर अहमद के साथ परेड में हिस्सा लेगा। इन्होंने पिछले साल तांगधर में हुए आतंकी हमले में अहम लड़ाई लड़ी थी और देख की इज्जत भी मिली। ये इन कुत्तों के लिए बेहद अच्छी खबर है जो इस बार इनको इसमे शामिल किया जा रहा है।