भारतीय मूल की प्रोफेसर ने खोजा 'डार्क मैटर' का पता लगाने का खास तरीका

नई दिल्ली (10 जनवरी): भारतीय मूल की एक अमेरिकी प्रोफेसर की अगुवाई वाली वैज्ञानिकों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने एक ऐसे नए तरीके की खोज की है, जिससे डार्क मैटर के वर्चस्व वाली छोटी गैलेक्सीस को ढूंढने में मदद मिलेगी। इसके अलावा गैलेक्सी की बाहरी डिस्क में मौजूद तरंगों के बारे में जानकारी हासिल हो सकेगी।

रिपोर्ट के मुताबिक, न्‍यूयॉर्क के रोसेस्टर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में असिस्टेंट प्रोफेसर सुकन्या चक्रवर्ती ने आकाशगंगाओं की अंदरूनी संरचना और द्रव्यमान को मापने के लिए आकाशगंगा की डिस्क के तरंगों का इस्तेमाल किया।

चक्रवर्ती ने यह नतीजे एक संवाददाता सम्मेलन में सात जनवरी को पेश किए। उनके अध्ययन के परिणामों को एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लेटर्स को सौंपा गया है। अदृश्य पार्टिकल को डार्क मैटर के नाम से जाना जाता है जिससे ब्रह्मांड का 85 प्रतिशत हिस्सा बना हुआ है। यह रहस्यमय पदार्थ खगोलशास्त्र में एक मूलभूत समस्या का प्रतिनिधित्व करता है क्योंकि इसके बारे में अभी तक यह समझा नहीं जा सका है।