सेक्स वर्कर्स से दुर्व्यवहार न करे पुलिस और न ही रेड से जुड़ी तस्वीरें बाहर आएं: सुप्रीम कोर्ट

कोर्ट ने ये निर्देश भारत के संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए सेक्स वर्कर्स के अधिकारों पर कोर्ट द्वारा नियुक्त पैनल द्वारा की गई कुछ सिफारिशों को स्वीकार करते हुए जारी किए।

सेक्स वर्कर्स से दुर्व्यवहार न करे पुलिस और न ही रेड से जुड़ी तस्वीरें बाहर आएं: सुप्रीम कोर्ट
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नई दिल्ली: मानव शालीनता और गरिमा की बुनियादी सेक्स वर्कर्स तक भी फैली हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए निर्देश दिया कि पुलिस को सेक्स वर्कर्स के साथ सम्मान का व्यवहार करना चाहिए और मौखिक या शारीरिक रूप से उनके साथ दुर्व्यवहार नहीं करना चाहिए।


इसके अलावा, कोर्ट ने निर्देश दिया कि मीडिया को रेस्क्यू ऑपरेशन को रिपोर्ट करते समय उनकी तस्वीरें प्रकाशित नहीं करनी चाहिए या उनकी पहचान का खुलासा नहीं करना चाहिए और कहा कि यदि मीडिया ग्राहकों के साथ सेक्स वर्कर्स की तस्वीरें प्रकाशित करता है तो इसे भारतीय दंड संहिता की धारा 354 सी के तहत लाया जाना चाहिए। भारतीय प्रेस परिषद को इस संबंध में उचित दिशा-निर्देश जारी करने का निर्देश दिया गया है।


कोर्ट ने ये निर्देश भारत के संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए सेक्स वर्कर्स के अधिकारों पर कोर्ट द्वारा नियुक्त पैनल द्वारा की गई कुछ सिफारिशों को स्वीकार करते हुए जारी किए।


कोर्ट ने कहा, 'मानव शालीनता और गरिमा की बुनियादी सुरक्षा सेक्स वर्कर्स और उनके बच्चों तक फैली हुई है, जो अपने काम से जुड़े सामाजिक कलंक का खामियाजा भुगतते हुए समाज के हाशिए पर चले जाते हैं, गरिमा के साथ जीने के अपने अधिकार से वंचित हो जाते हैं और अपने बच्चों को समान प्रदान करने के अवसर को भी खो देते हैं।'


लाइव लॉ की खबर के मुताबिक, न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव, न्यायमूर्ति बी.आर. गवई और ए.एस. बोपन्ना ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार पारित निर्देश तब तक लागू रहेंगे जब तक केंद्र सरकार एक कानून के साथ नहीं आती।


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