सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा स्थित सुपरटेक ट्विन टॉवर को गिराने की अवधि तीन महीने के लिए बढ़ाई, जानें वजह

नोएडा के सुपरटेक ट्विन टॉवर को गिराने का काम करने वाली डिमोलिशन एजेंसी एडिफिस इंजीनियरिंग ने सुप्रीम कोर्ट में एक आवेदन देकर इस काम के लिए मोहलत मांगी है।

सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा स्थित सुपरटेक ट्विन टॉवर को गिराने की अवधि तीन महीने के लिए बढ़ाई, जानें वजह
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नई दिल्ली: नोएडा के सुपरटेक ट्विन टॉवर को गिराने वाली डिमोलिशन एजेंसी एडिफिस इंजीनियरिंग ने सुप्रीम कोर्ट में एक आवेदन देकर इस काम के लिए मोहलत मांगी है। बता दें कि कोर्ट ने एजेंसी को विवादित टॉवरों को ध्वस्त करने के लिए 22 मई तक का समय दिया था। लेकिन एडिफिस इंजीनियरिंग ने कहा है कि परीक्षण विस्फोट से पता चला है कि संरचना शुरूआती अनुमान से कहीं ज्यादा मजबूत है, इसलिए इसे ध्वस्त करने की प्रक्रिया में तीन महीने का समय चाहिए होगा।


एडिफिस इंजीनियरिंग की याचिका पर सुनवाई करते हुए भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने इमारत को ध्वस्त करने की समय सीमा को बढ़ाकर 28 अगस्त करने का आदेश दिया है।


इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा में स्थित सुपरटेक के ट्विन टावर्स को गिराने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने पहले कहा था कि इस प्रोजेक्ट को बिल्डरों और नोएडा प्राधिकरण के बीच गठजोड़ के चलते भारी अनियमितताओं वाली नींव पर खड़ा किया गया था।


बता दें कि सुपरटेक समूह के मालिक आर के अरोड़ा के लिए यह आदेश बड़ा झटका साबित हुआ। साथ ही उन लोगों के लिए भी असमंजस की स्थिति खड़ी हो गई जो ना सिर्फ इन टॉवर्स बल्कि कंपनी के अन्य प्रोजेक्ट्स में संपत्ति खरीद चुके थे या खरीदने का मन बना रहे थे।


बता दें कि जब सुप्रीम कोर्ट को पता चला कि नोएडा प्राधिकरण और बिल्डर के बीच मिलीभगत है, तो उसने 40 मंजिला इमारत को गिराने का आदेश दिया। नोएडा के सेक्टर-93ए स्थित ढांचे को गिराने के लिए शुरुआती आदेश 31 अगस्त 2021 को जारी किया गया था।


अदालत ने पूरे मामले में अनियमितताओं का अवलोकन किया और कहा कि निर्णय व्यक्तिगत फ्लैट मालिकों की सहमति के बिना लिया गया था, जो कि यूपी अपार्टमेंट अधिनियम का उल्लंघन करता है।

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