Draupadi Murmu: जानिए कौन हैं द्रौपदी मुर्मू, जिन्हें एनडीए ने बनाया राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार

Presidential Election 2022: एनडीए ने मंगलवार को राष्ट्रपति चुनाव के लिए अपने उम्मीदवार का ऐलान किया। बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने द्रौपदी मुर्मू (Draupadi Murmu) के नाम का ऐलान कर कहा, सर्वसम्मति से एनडीए के घटक दलों ने उन्हें उम्मीदवार चुना है।

Draupadi Murmu: जानिए कौन हैं द्रौपदी मुर्मू, जिन्हें एनडीए ने बनाया राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार
x

नई दिल्ली: एनडीए ने मंगलवार को राष्ट्रपति चुनाव के लिए अपने उम्मीदवार का ऐलान किया। बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने द्रौपदी मुर्मू के नाम का ऐलान कर कहा, सर्वसम्मति से एनडीए के घटक दलों ने उन्हें उम्मीदवार चुना है। करीब 20 नामों पर विस्तृत चर्चा की गई, इसके बाद द्रौपदी मुर्मू का नाम फाइनल हुआ। 


कौन हैं द्रौपदी मुर्मू? 

द्रौपदी मुर्मू एनडीए का आदिवासी चेहरा हैं। वह झारखंड की पहली आदिवासी और महिला राज्यपाल (2015-21) रह चुकी हैं। वे एनडीए की ओर से राष्ट्रपति पद के लिए संभावित उम्मीदवारों में सबसे आगे थीं। द्रौपदी के नाम को लेकर एनडीए के अन्य घटक दलों ने सहमति जताई। केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान भी चर्चा में थे, लेकिन द्रौपदी का नाम फाइनल किया गया। 





और पढ़िए – Viral Video: कर्नाटक के नेता की बेकार हरकत, सबके सामने स्कूल के प्रिंसिपल को जड़ दिया थप्पड़





1997 में शुरू की राजनीति 

द्रौपदी मुर्मू का जन्म 20 जून 1958 को ओडिशा में हुआ था। उनके पिता का नाम बिरंची नारायण टुडू था। उनका विवाह श्याम चरम मुर्मू से हुआ था। वह ओडिशा में मयूरभंज जिले के कुसुमी ब्लॉक के उपरबेड़ा गांव के एक संथाल आदिवासी परिवार से आती हैं। रामादेवी वुमंस कॉलेज भुवनेश्वर ओडिशा से उन्होंने बीए किया है। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत 1997 में की थी और तब से उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। द्रौपदी मुर्मू 1997 में ओडिशा के राजरंगपुर जिले में पार्षद चुनी गईं। वह वाइस चेयरपर्सन भी रहीं। उसी वर्ष मुर्मू भाजपा की ओडिशा इकाई के अनुसूचित जनजाति मोर्चा की उपाध्यक्ष भी बनीं।




कैबिनेट मंत्री रह चुकी हैं 

राजनीति में आने से पहले मुर्मू ने श्री अरबिंदो इंटीग्रल एजुकेशन एंड रिसर्च, रायरंगपुर में मानद सहायक शिक्षक और सिंचाई विभाग में कनिष्ठ सहायक के रूप में काम किया था। मुर्मू ने 2002 से 2009 तक और फिर 2013 में मयूरभंज के भाजपा जिलाध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया। वह ओडिशा में दो बार भाजपा की विधायक रही हैं और नवीन पटनायक सरकार में कैबिनेट मंत्री भी थीं। उस समय ओडिशा में बीजू जनता दल और भाजपा की गठबंधन सरकार चल रही थी। 


नीलकंठ पुरस्कार से सम्मानित

ओडिशा विधानसभा ने द्रौपदी मुर्मू को सर्वश्रेष्ठ विधायक के लिए नीलकंठ पुरस्कार से सम्मानित किया। द्रौपदी मुर्मू ने ओडिशा में भाजपा की मयूरभंज जिला इकाई का नेतृत्व किया और ओडिशा विधानसभा में रायरंगपुर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। 


संघर्षभरा रहा है जीवन 

द्रौपदी मुर्मू का जीवन संघर्ष से भरा रहा है। उनके पति की मृत्यु के बावजूद अपने समुदाय के लिए काम करने का उनका संकल्प अडिग था। उन्हें आदिवासी समुदाय के उत्थान के लिए काम करने का 20 साल का अनुभव है और वह भाजपा के लिए एक महत्वपूर्ण आदिवासी चेहरा हैं। 





और पढ़िए – महाराष्ट्र के राजनीतिक संकट पर चर्चा के लिए महा विकास अघाड़ी नेताओं की बैठक





एनडीए चाहती है आदिवासी चेहरा 

दरअसल, एनडीए देश को पहला आदिवासी राष्ट्रपति देना चाहती है। एनडीए ने गुजरात, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए इस पर जोर दिया है। आदिवासी समुदाय पर बीजेपी का फोकस है।अभी तक देश में कोई आदिवासी राष्ट्रपति नहीं रहा। इस लिहाज से मुर्मू आदिवासी और महिला, दोनों वर्ग में फिट हैं। 


बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, आदिवासी ट्राइबल प्रत्याशी आज तक राष्ट्रपति के रूप में सामने नहीं आया है। ऐसे में संसदीय बोर्ड का मत था कि द्रौपदी मुर्मू के नाम पर मुहर लगाई जाए। जैसे सर्वपल्ली राधाकृष्णन शिक्षा से जुड़े रहे थे, वैसे ही द्रौपदी मुर्मू का जीवन शिक्षा से जुड़ा रहा है। एक लंबा अरसा उनका विधायक के रूप में रहा, इसके बाद वे उड़ीसा में मंत्री भी रहीं। 








और पढ़िए – देश से जुड़ी खबरें यहाँ पढ़ें






Click Here - News 24 APP अभी download करें

Next Story