कचरे से पटा केदारनाथ धाम, पॉलीथिन-प्लास्टिक बोतलों का लगा अंबार, एक्सपर्ट ने चेताया

चार धाम यात्रा पर काफी ज्यादा श्रद्धालु आ रहे है। जिससे वहां जगह-जगह प्लास्टिक की थैलियों, बोतलों सहित कचरे का ढेर दिखाई दे रहा है। यात्रा रूट पर कचरा पड़ा है।

कचरे से पटा केदारनाथ धाम, पॉलीथिन-प्लास्टिक बोतलों का लगा अंबार, एक्सपर्ट ने चेताया
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केदारनाथ: चारधाम यात्रा में इस साला भारी भीड़ उमड़ी है। श्रद्धालु की लंबी-लंबी कतारें दर्शन के लिए लाइनों में खड़ी हैं। कोरोना के कारण दो साल बाद इस साल चार धाम यात्रा पर काफी ज्यादा श्रद्धालु आ रहे है। जिससे वहां जगह-जगह प्लास्टिक की थैलियों, बोतलों सहित कचरे का ढेर दिखाई दे रहा है। यात्रा रूट पर कचरा पड़ा है।


एएनआई ने बर्फ से ढके पहाड़ों के साथ भूमि के बड़े हिस्से में फैले कई टेंटों की एक तस्वीर ट्वीट की। हालांकि, यह क्षेत्र पूरी तरह से फेंकी गई प्लास्टिक की वस्तुओं जैसे बैग और बोतलों के साथ-साथ अन्य तरह के कचरों से पटा पड़ा है। इससे वैज्ञानिकों और पर्यावरण विशेषज्ञों की चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है कि इससे प्रदूषण और नेचुरल डिजास्टर्स का खतरा भी बढ़ सकता है।


एक्सपर्ट ने दी चेतावनी

गढ़वाल सेंट्रल यूनिवर्सिटी के भूगोल विभाग के प्रमुख प्रोफेसर एमएस नेगी के हवाले से कहा, "जिस तरह से केदारनाथ जैसे संवेदनशील स्थान पर प्लास्टिक कचरा ढेर हो गया है, वह हमारी पारिस्थितिकी के लिए खतरनाक है। इससे क्षरण होगा जो भूस्खलन का कारण बन सकता है। हमें 2013 की त्रासदी को ध्यान में रखना चाहिए और सावधान रहना चाहिए।" 


प्रो नेगी जून 2013 में उत्तराखंड में बादल फटने का जिक्र कर रहे थे, जिसके कारण विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन हुआ, जिससे यह भारत की सबसे खराब प्राकृतिक आपदाओं में से एक बन गया। समाचार एजेंसी ने HAPPRC के निदेशक प्रो एमसी नौटियाल के हवाले से कहा, "पर्यटकों की आमद कई गुना बढ़ गई है, जिसके कारण प्लास्टिक कचरा बढ़ गया है क्योंकि हमारे पास उचित स्वच्छता सुविधाएं नहीं हैं।"


बता दें कि जून 2013 में बादल फटने से पूरे उत्तराखंड में विनाशकारी बाढ़ और लैंडस्लाइड हुआ। 4 हजार से ज्यादा लोग लापता हो गए थे। इस बार तीन मई से अब तक चार धाम तीर्थस्थलों के रास्ते में 57 तीर्थयात्रियों की मौत हुई है।

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