महंगाई आउट ऑफ कंट्रोल! थोक मुद्रास्फीति रिकॉर्ड स्तर पर, खाने-पीने के सामान की कीमतों में लगी आग

थोक महंगाई ने तीन दशक के रिकॉर्ड स्तर को छु लिया है। थोक मूल्य सूचकांक आधारित (WPI) महंगाई दर अप्रैल में 15.08% पर पहुंच गई।

महंगाई आउट ऑफ कंट्रोल! थोक मुद्रास्फीति रिकॉर्ड स्तर पर, खाने-पीने के सामान की कीमतों में लगी आग
x

नई दिल्ली: बढ़ती महंगाई देश के लिए चिंता का कारण बनता जा रहा है। रोजमर्रा की चिजों के दाम सातवें आसमान पर है। इस बीच  थोक महंगाई ने तीन दशक के रिकॉर्ड स्तर को छु लिया है। थोक मूल्य सूचकांक आधारित (WPI) महंगाई दर अप्रैल में 15.08% पर पहुंच गई। दिसंबर 1998 के बाद पहली बार थोक महंगाई दर 15% के पार पहुंची है। दिसंबर 1998 में ये 15.32% पर थी। अप्रैल 2021 से लगातार थोक महंगाई दहाई अंक में बनी हुई है। 


एक साल पहले अप्रैल में थोक कीमतों में 15.08% की वृद्धि हुई, वाणिज्य मंत्रालय द्वारा मंगलवार को जारी आंकड़ों से पता चला। यह 14 अर्थशास्त्रियों के ब्लूमबर्ग सर्वेक्षण में 14.92% लाभ के औसत अनुमान से अधिक है। सितंबर 1991 में थोक मूल्य सूचकांक उच्चतम स्तर पर पहुंच गया जब प्रिंट 16.31% पर आया।




और  पढ़िए – अमित शाह ने उच्च स्तरीय बैठक में की जम्मू-कश्मीर की स्थिति की समीक्षा, अमरनाथ यात्रा की तैयारियों पर भी नजर





पिछले सप्ताह के आंकड़ों से पता चलता है कि इसी महीने खुदरा मुद्रास्फीति आठ साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई। भारतीय रिजर्व बैंक ने इस महीने की शुरुआत में कीमतों में वृद्धि को रोकने के लिए एक आश्चर्यजनक दर वृद्धि की घोषणा की, जो इस साल अपनी 6% ऊपरी सहनशीलता सीमा को पहले ही तोड़ चुकी है। जून में होने वाली अगली मौद्रिक नीति में, दरों में और वृद्धि करने और अपने 5.7 प्रतिशत मुद्रास्फीति पूर्वानुमान को संशोधित करने की उम्मीद है।


इससे पहले खाने-पीने के सामान से लेकर तेल, गैस के दाम बढ़ने से रिटेल महंगाई 8 साल के पीक पर पहुंच गई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) आधारित रिटेल महंगाई दर अप्रैल में बढ़कर 7.79% हो गई। मई 2014 में महंगाई 8.32% थी।






और  पढ़िए – देश से जुड़ी खबरें यहाँ पढ़ें








 

Click Here - News 24 APP अभी download करें

Next Story