नहीं रहें 1971 में लोंगेवाला की लड़ाई के हीरो कर्नल धर्मवीर सिंह

1971 में लोंगेवाला की लड़ाई में पाकिस्तान पर भारत की जीत में अहम भूमिका निभाने वाले कर्नल धर्मवीर सिंह का हरियाणा के गुरुग्राम में निधन हो गया।

नहीं रहें 1971 में लोंगेवाला की लड़ाई के हीरो कर्नल धर्मवीर सिंह
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नई दिल्ली: 1971 में लोंगेवाला की लड़ाई में पाकिस्तान पर भारत की जीत में अहम भूमिका निभाने वाले कर्नल धर्मवीर सिंह का 16 मई को हरियाणा के गुरुग्राम में निधन हो गया।


1992 और 1994 के बीच युद्ध नायक ने 23 पंजाब बटालियन की कमान संभाली। हालांकि, उन्हें पाकिस्तान के साथ लोंगेवाला की लड़ाई के दौरान उनकी सतर्कता के लिए हमेशा याद किया जाएगा।




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कर्नल (जो उस समय कैप्टन थे) 4 दिसंबर, 1971 को लोंगेवाला में थे, जब उन्हें सीमा पार एक टैंक की आवाजाही का पता चला। उन्होंने ऑपरेटर राजकुमार के माध्यम से मुख्यालय को संदेश भेजा और शुरू में किसी ने उन पर विश्वास नहीं किया, लेकिन उन्होंने उन्हें चलते टैंकों की गड़गड़ाहट की आवाज सुनाई।


उनके कमांडर ने तब उन्हें बटालियन मुख्यालय से संपर्क करते हुए पाकिस्तानी टैंकों के एडवांस बख्तरबंद स्तंभ का पता लगाने का आदेश दिया, जिसके बाद रिइंफोर्समेंट, ऑर्मरी और आर्टिलरी की मांग की।


बटालियन मुख्यालय ने धर्मवीर को रुकने और हमले को जितना संभव हो सके रोकने का विकल्प दिया, या रामगढ़ के लिए वापसी करने का विकल्प दिया, क्योंकि उस रात रिइंफोर्समेंट उपलब्ध नहीं होगा। उन्होंने रहना चुना।


एक बार मीडिया से बात करते हुए धर्मवीर सिंह ने कहा कि सीमा चौकी पर 20 से 22 जवान ही थे, जिन्होंने किसी तरह पाकिस्तानी सेना को पूरी रात अपने कब्जे में रखा और सुबह वायुसेना से हंटर विमानों की मदद ली।





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अगले दिन दोपहर तक हमला पूरी तरह से समाप्त हो गया, जिसमें पाकिस्तान के 22 टैंक विमान की फायरिंग से नष्ट हो गए, 12 टैंक जमीनी फायरिंग से और कुछ को छोड़े जाने के बाद कब्जा कर लिया गया, पोस्ट के आसपास के रेगिस्तान में कुल 100 वाहनों के नष्ट या क्षतिग्रस्त होने का दावा किया गया।


पाकिस्तानी सेना को पीछे हटने के लिए मजबूर होना पड़ा, जब डिवीजन की कैवेलरी रेजिमेंट से भारतीय टैंक, कर्नल बावा गुरुवचन सिंह की कमान वाले 20वें लांसर्स ने 17वीं बटालियन, राजपूताना राइफल्स के साथ अपना जवाबी हमला किया।






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