1988 road rage case: सुप्रीम कोर्ट से सिद्धू को झटका, समर्पण के लिए नहीं मिला अधिक समय

सिद्धू के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने स्वास्थ्य कारणों से समर्पण के लिए कुछ हफ्तों का समय देने का अनुरोध किया। इसपर जस्टिस ए एम खानविलकर ने कहा कि सुनवाई के लिए विशेष बेंच का गठन करना होगा इसलिए सिद्धू चीफ जस्टिस से अनुरोध करें।

1988 road rage case: सुप्रीम कोर्ट से सिद्धू को झटका, समर्पण के लिए नहीं मिला अधिक समय
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नई दिल्ली: नवजोत सिंह सिद्धू को सुप्रीम कोर्ट से समर्पण करने के लिए और अधिक समय नहीं मिल पाया है। उन्होंने अनुरोध किया था कि उन्हें 1988 के रोड रेज मामले के संबंध में आत्मसमर्पण करने के लिए कुछ सप्ताह का समय दिया जाए। सिद्धू को बीते दिन गुरुवार को शीर्ष अदालत ने एक साल के कारावास की सजा सुनाई थी। अधिक समय मांगने पर जस्टिस ए एम खानविलकर ने कहा था कि सुनवाई के लिए विशेष बेंच का गठन करना होगा इसलिए सिद्धू चीफ जस्टिस से अनुरोध करें। हालांकि, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है।





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अदालत ने सरेंडर से राहत देने पर तुरंत सुनवाई करने से मना कर दिया है। सिद्धू के वकील चीफ जस्टिस के पास इसपर तुरंत सुनवाई की मांग की थी, लेकिन चीफ जस्टिस ने इसकी इजाजत नहीं दी और कहा कि वह रजिस्ट्री के पास जाकर पहले याचिका दें। बताया जा रहा है कि याचिका पर सुनवाई की उम्मीद कम है। कांग्रेस नेता ने कहा था कि उन्हें अपने चिकित्सा मसलों को व्यवस्थित करने के लिए कुछ समय चाहिए। 


सिद्धू के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने स्वास्थ्य कारणों से समर्पण के लिए सुप्रीम कोर्ट से कुछ हफ्तों का समय देने का अनुरोध किया था। अदालत ने सिंघवी से कहा है कि वह इस पर आज सुनवाई के लिए विशेष पीठ गठित करने के लिए प्रधान न्यायाधीश एनवी रमना के समक्ष अनुरोध करें। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को 34 साल पुराने रोड रेज मामले में नवजोत सिंह सिद्धू की सजा बढ़ा दी, जिसमें गुरनाम सिंह (65) की मौत हो गई थी। 2018 में, सिद्धू को ₹1,000 के जुर्माने के साथ छोड़ दिया गया था।


अभियोजन पक्ष के अनुसार, दिसंबर 1988 में एक रोड रेज की घटना में सिद्धू ने गुरनाम सिंह की पिटाई की थी। पीड़ित को अस्पताल ले जाया गया जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। सिद्धू को सितंबर 1999 में एक निचली अदालत ने बरी कर दिया था, लेकिन दिसंबर 2006 में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने इस फैसले को उलट दिया था। उच्च न्यायालय ने सिद्धू और सह-आरोपी रूपिंदर सिंह संधू को गैर इरादतन हत्या का दोषी ठहराया, उन्हें तीन साल की जेल तक की सजा सुनाई गई थी। उन्होंने इसे सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी, जिसने सिद्धू को चोट पहुंचाने के मामूली आरोप के तहत दोषी ठहराया, जबकि संधू को मई 2018 में एक आदेश द्वारा सभी आरोपों से बरी कर दिया गया। वहीं, अब उन्होंने सुनाई गई एक साल की सजा पर सिद्धू ने कहा कि वह फैसले को स्वीकार करते हैं और 'कानून' के सामने खुद को पेश करेंगे।







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