...और इस तरह पाकिस्तान से भारत ने जीती वायसराय की बघ्घी

नई दिल्ली (25 जनवरी): 26 जनवरी को होने वाले गणतंत्र दिवस की तैयारियां जोरों पर हैं। इस दौरान राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी एक बार फिर से अपनी पारंपरिक बग्‍घी में बैठकर गणतंत्र दिवस के समारोहों में शिरकत करते दिखाई देंगे। पिछले साल भी वह बजट सत्र के पहले दिन पारंपरिक बग्घी पर सवार होकर संसद के दोनों सदनों को संबोधित करने के लिए पहुंचे थे।मुखर्जी ने 2014  में बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी से बग्घी पर बैठने की दोबारा परंपरा शुरू की थी। करीब 30 वर्षों से सुरक्षा कारणों के चलते इस बग्घी का यूज नहीं हो रहा था। इसकी जगह राष्ट्रपति लिमोजिन कार से सार्वजनिक समारोहों में आते थे। हालांकि इस बग्‍घी का इतिहास काफी रोचक रहा है।...

- आजादी से पहले इस बग्घी का इस्तेमाल भारत के वायसराय या गवर्नर जनरल किया करते थे।

- आजादी के बाद देश बंटा दोनों देशों के बीच बहुत सारी चीजें बंटी।

- इसी के साथ ही गवर्नमेंट जनरल बॉडीगार्ड जिसे अब प्रेसीडेंट बॉडीगार्ड कहा जाता है का भी बंटवारा हो गया।

- भारत और पाकिस्‍तान के बीच इस पूरी यूनिट को 2:1 के अनुपात से बंटा गया।

- जब बात बग्‍घी की आई तो इसपर दोनों देशों ने अलग-अलग दावा किया।

- किसे बग्‍घी मिले, जब इसपर सहमति नहीं बनी तो फिर ये तय हुआ कि सिक्‍का उछालकर इसका फैसला किया जाए।

- भारत और पाकिस्तान दोनों अपना दावा जता रहे थे।

- बाद में तय हुआ कि वायसराय की अंगरक्षक टुकड़ी के तत्कालीन कमांडेंट और उनके डिप्टी के बीच सिक्का उछाला जाए।

- बॉडीगार्ड्स में जहां कमांडेट भारत में रहने जा रहे थे वहीं उनके डिप्‍टी जो एक मुस्लिम थे, उन्‍होंने पाकिस्‍तान जाने का फैसला किया था।

- सिक्का उछालने के इस निर्णय में कमांडेंट को जीत मिली और पाकिस्तान को अपना दावा छोड़ना पड़ा।