INSIDE STORY: #India #US के बीच सबसे बड़ी 'Military Deal', डील से चीन की उड़ी नींद, पाक के छूटे पसीने...

डॉ. संदीप कोहली,​

नई दिल्ली (30 अगस्त): भारत और अमेरिका के बीच सोमवार को हुआ ऐतिहासिक समझौता। समझौते के तहत दोनों देश एक दूसरे की सैन्य सुविधाओं का कर सकेंगे इस्तेमाल। भारत के रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर और अमेरिकी रक्षा मंत्री एश्टन कार्टर ने सोमवार को अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन में लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरैंडम ऑफ अग्रीमेंट (LEMOA) पर हस्ताक्षर किए। समझौते के बाद अब भारत और अमेरिका एक दूसरे की जमीन, हवाई और नौसैनिक अड्डों के साथ मरम्मत, ईधन आपूर्ति और अन्य सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकेंगे। दोनों देशों के बीच हुए इस समझौते को चीन की बढ़ती ताकत से मुकाबले की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है। जानिए आखिर क्या खास है इस समझौते में...

- लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरैंडम ऑफ अग्रीमेंट (LEMOA)से दोनों देशों के सैन्य बलों की कार्यक्षमता बढ़ेगी।  - अमेरिकी और भारतीय सेना के एक दूसरे के बीच लॉजिस्टिक, सप्लाई और सर्विस में मदद करेगी।  - खास तौर पर मानवीय आपदा के समय या आपदा बचाव में इससे फायदा होगा। - समझौते के मुताबिक, दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे के साजो-सामान, एयर और नेवल बेस का इस्तेमाल कर सकेंगे।  - जिससे दोनों देशों को फाइटर प्लेन और ट्रांसपोर्ट प्लेन को ईंधन मिल सकेगा।  - साथ ही समुद्र में एक-दूसरे के युद्धक बेड़ों से ईंधन, पानी और भोजन जैसे संसाधनों की शेयरिंग भी हो सकेगी।  - समझौते के तहत भारत-अमेरिकी नौसेना एक-दूसरे को ज्वाइंट ऑपरेशन और एक्सरसाइज में सपोर्ट करेंगी। - इस समझौते के तहत अमेरिका भारत से सुरक्षा संबंधी जानकारियां भी साझा करेगा। - लेकिन डील में यह साफ है कि भारत की धरती पर अमेरिकी सैनिकों की तैनाती की कोई बात नहीं होगी।  - साथ ही भारत के किसी मित्र देश से अमेरिका अगर लड़ाई छेड़ता है तो उसे ये सहूलियतें उपल्बध नहीं होंगी। - डील का दूसरा मकसद चीन की ताकत खासकर समुद्री ताकत को बढ़ने से रोकना है । - यह भी कहा जा रहा है कि इस अग्रीमेंट से भारत और रूस के रिश्तों में तनाव आ सकता है।  - रूस भारत का पुराना और भरोसेमंद सहयोगी रहा है, यूएस से बढ़ती नजदीकियां रुस को हजम नहीं होंगी। 

एक दशक बाद हुआ भारत-अमेरिका के बीच समझौता.... - सोमवार को पेंटागन में दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत के बाद एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर ने कहा कि डील में किसी भी सैन्य अड्डे को स्थापित करने या इस तरह की किसी गतिविधि का कोई प्रावधान नहीं है। LEMOA भारत और अमेरिका की सेनाओं के बीच साजो-सामान संबंधी सहयोग, आपूर्ति और सेवाओं के लिए समझौता है। इसमें भोजन, पानी, घर, परिवहन, पेट्रोल, तेल, कपड़े, चिकित्सा सेवाएं, कलपुर्जे, मरम्मत एवं रखरखाव की सेवाएं, प्रशिक्षण सेवाएं और अन्य साजो-सामान संबंधी वस्तुएं एवं सेवाएं शामिल हैं। 

- पर्रिकर ने संवाददाताओं से कहा, इस साजो-सामान समझौते को करने में हमें 12 से 13 साल का वक्त लगा है। साथ ही उन्होंने कहा कि हम दूसरे पहलुओं पर भी विचार करेंगे। इसके अलावा अमेरिका और भारत दो फाउंडेशनल अग्रीमेंट्स को भी फाइनल कर रहे हैं। ये दो डील हैं- कम्युनिकेशन इंटरोपरैबिलिटी ऐंड सिक्यॉरिटी मेमोरैंडम ऑफ अग्रीमेंट (CISMOA) और बेसिक एक्सचेंज ऐंड कोऑपेरशन अग्रीमेंट फोर जियोस्पेसल कोऑपेरशन (BECA)।

- भारत के साथ रक्षा संबंधों को और मजबूत करने के लिए अमेरिका एक दशक से भी ज्यादा समय से चार बुनियादी समझौतों पर जोर दे रहा है। जिसमें से दो समझौतो पर हस्ताक्षर हो गए हैं और दो पर बातचीत चल रही है। जिन दो पर हस्ताक्षर हो चुके हैं वो हैं, जनरल सिक्युरिटी ऑफ मिलिटरी इन्फॉर्मेशन एग्रीमेंट (GSOMIA), 2002 में हुआ था और लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (LEMOA) जिस पर सोमवार को हस्ताक्षर हुए।

समझौते से चीन की उड़ी नींद... - भारत चीन के बीच सीमा विवाद, आर्थिक और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा रही है, जिससे निपटने के लिए भारत को विश्व में एक मजबूत साथी की जरूरत थी। - राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि दक्षिण चीन सागर में चीन की अकड़ के मद्देनजर भारत के साथ अमेरिका का यह अग्रीमेंट बेहद अहम है।  - अमेरिकी मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक आने वाले दिनों में इंडो-पसीफिक में अमेरिकी नेवी की 60 पर्सेंट सरफेस शिप्स की तैनाती की योजना है।  - समझौते के बाद भारत को चीन से निपटने के लिए अमेरिका के अलावा जापान, ऑस्ट्रेलिया दक्षिणपूर्व एशियाई देशों का सहयोग भी मिलेगा। - आतंकवाद पर भी साधा जा सकेगा निशाना, समझौते से मिलने वाली सुविधाओं का इस्तेमाल दुश्मन और आतंकी दोनों के खिलाफ भी करेंगे। - फोर्ब्स मैगजीन ने समझौते से पहले एक आर्टिकल लिखा- चीन और पाक सावधान इंडिया और अमेरिका के बीच बड़े वॉर पैक्ट पर होने जा रहे हैं हस्ताक्षर।

समझौते से पाकिस्तान के छूटे पसीने... - रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस समझौते से इंडिया का पास जेट इंजन और मानव रहित हवाई टेक्नॉलजी यानी ड्रोन आ जाएंगे। - इससे पाकिस्तान की डिफेंस क्षमता बुरी तरह से प्रभावित होगी, पाकिस्तान द्वारा चलाए जा रहे आतंकवाद पर नकेल कसी जा सकेगी। - अमेरिका पहले ही भारत को मिसाइल टेक्नॉलजी कंट्रोल रेजिम में एंट्री देकर अपनी दोस्ती जता चुका है, इसे लेकर भी पाकिस्तान का पसीना छूट रहा है। - साथ ही भारत से दोस्ती के बाद अमेरिका ने पाकिस्तान को दी जा रही सैन्य और आर्थिक मदद भी कम कर दी है। - जहां एक ओर पाकिस्तान की आर्थिक सहायता को 350 करोड़ से घटाकर 100 करोड़ कर दिया गया है। - वहीं दूसरी और अमेरिका ने पाकिस्तान को एफ-16 लड़ाकू विमान देने पर भी रोक लगा दी है।

भारत, अमेरिका और चीन की सैन्य ताकत...