भारत-यूएस के बीच 'LEMOA' समझौते से इसलिए डरे हैं पाक और चीन...

नई दिल्ली (30 अगस्त: भारत और अमेरिका के बीच 'LEMOA' समझौता हुआ है। जिससे चीन से लेकर पाकिस्तान धबराया हुआ है। इस समझौते के तहत दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे के सैनिक ठिकानों का प्रयोग कर सकेंगे। हालांकि यह सिर्फ मरम्मत और सप्लाई को लेकर किया प्रयोग में आ सकेंगे।

इससे दोनों देशों को काफी फायदे होंने वाले हैं। वैसे इस समझौते का कोई सैन्य अड्डा बनाने से लेना-देना नहीं...

- एलईएमओए दोनों देशों को एक साथ काम करने में सक्षम बनाने में बेहद महत्वपूर्ण है। - इस समझौते के तहत हम एक-दूसरे को पूरी तरह से साजो-समान संबंधी पहुंच एवं सुगमता मुहैया कराते हैं। - यह किसी भी तरह से सैन्य अड्डे स्थापित करने वाला समझौता नहीं है। - यह संयुक्त अभियानों से जुड़े साजो-सामान की आपूर्ति बेहद आसान बनाता है। - यह समझौता न सिर्फ जरूरी सहयोग को वित्तीय मदद देने के लिए अतिरिक्त माध्यम उपलब्ध कराता है।

चीन और पाकिस्तान सावधान! - चीन को काबू में रखने के लिए ओबामा प्रशासन के कार्यकाल का यह एक बेहद अहम अग्रीमेंट है। इस अग्रीमेंट का असर पूरे एशिया में पड़ेगा। - मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक आने वाले दिनों में इंडो-पसीफिक में अमेरिकी नेवी की 60 पर्सेंट सरफेस शिप्स की तैनाती की योजना है। - इराक और अफगानिस्तान में अमेरिका को सब कुछ बनाना पड़ा था, लेकिन इंडिया के पास पहले से ही बुनियादी चीजें मौजूद हैं। - इंडिया और चीन की शत्रुता किसी से छुपी नहीं है। इसे सीमा विवाद से लेकर इकनॉमिक और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा में साफ महसूस किया जा सकता है। - साउथ चाइना सी में चीन की अकड़ के मद्देनजर भारत के साथ अमेरिका का यह अग्रीमेंट बेहद अहम है। - इसके साथ ही इंडिया और अमेरिका इस समझौते से मिलने वाली सुविधाओं का इस्तेमाल अपने समान दुश्मन और मजहबी आतंकियों के खिलाफ भी करेंगे। - CISMOA और BECA समझौते से इंडिया को सुपरपावर चाइना के सामने खड़ा होने के लिए मजबूत आधार मिलेगा। - इंडिया का पास जेट इंजन और मानव रहित हवाई वाहन टेक्नॉलजी आ जाती है तो पाकिस्तान की डिफेंस क्षमता बुरी तरह से प्रभावित होगी। - अमेरिका पहले ही भारत को मिसाइल टेक्नॉलजी कंट्रोल रेजिम में एंट्री देकर अपनी दोस्ती जता चुका है। इसे लेकर भी पाकिस्तान का पसीना छूट रहा है।