पाक की नापाक हरकत और चीन की चालबाजियों को मिल कर रोकेंगे भारत-यूएस !

नई दिल्ली (10 फरवरी): पाक की नापाक हरकतों और चीन की पनडुब्बियों पर एक साथ नज़र रखने के लिये भारत अमेरिका के प्रस्तावित समझौतों पर हस्ताक्षर कर सकता है। अमेरिका के रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस ने मनोहर पार्रिकर को फोन किया तो इन चर्चाओं को और बल मिल गया है। ट्रंप प्रशासन रक्षा संबंध बढ़ाने की खातिर इस पर साइन के लिए भारत पर जोर डालेगा।

अमेरिका ने भारत से सैन्य सहयोग बढ़ाने के लिए 2004 में चार बेसिक समझौतों का प्रस्ताव रखा था। इनमें पहला 'एंड यूजर वेरिफिकेशन ऐंड मॉनिटरिंग अग्रीमेंट' काफी पहले साइन हो चुका है। दूसरा 'लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ अग्रीमेंट', जो 12 साल की बातचीत के बाद अब लागू होने जा रहा है। बाकी दो हैं- कम्यूनिकेशंस कॉम्पैटिबिलिटी ऐंड सिक्यॉरिटी अग्रीमेंट और बेसिक एक्सचेंज ऐंड कोऑपरेशन अग्रीमेंट । बताया जाता है कि कम्यूनिकेशंस कॉम्पैटिबिलिटी ऐंड सिक्यॉरिटी अग्रीमेंट के तहत दोनों देशों की सेनाओं को सिक्युअर कम्युनिकेशन की सुविधा हासिल होगी यानी अमेरिकी और भारतीय विमानों में लगे सेंसर और इक्विपमेंट आपस में डेटा शेयर कर सकेंगे।  बेसिक एक्सचेंज ऐंड कोऑपरेशन अग्रीमेंट के जरिये किसी खास लोकेशन का डेटा शेयर किया जा सकेगा।

रक्षा मंत्रालय का मानना है कि इन समझौतों का मकसद है दोनों देशों के सिस्टम में एक साथ ऑपरेट की क्षमता कायम करना। मंत्रालय के एक सूत्र ने बताया कि साथ ऑपरेट करने के लिए भारत को पहले वैसी कपैसिटी बनानी होगी। अमेरिका इन समझौतों से जुड़े उपकरणों को भारत को देने से पहले इन्हें साइन करने के लिए कह सकता है। अमेरिका दलील देता रहा है कि बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में चीन का दखल बढ़ रहा है। चीन की पाकिस्तान से दोस्ती जग जाहिर है और वह बांग्लादेश से भी संपर्क बढ़ा रहा है। अमेरिकी पैसिफिक कमांड के कमांडर ने कहा है कि कम्युनिकेशंस कॉम्पैटिबिलिटी ऐंड सिक्यॉरिटी अग्रीमेंट से दोनों देशों की नौसेनाएं दूसरों की पनडुब्बियों पर बेहतर तरीके से नजर रख सकेंगी। उनका इशारा चीनी पनडुब्बियों की ओर था।