अमेरिका कर सकेगा भारतीय सैन्य संसाधनों का इस्तेमाल, समझौते के लिए बनी सहमति

नई दिल्ली (12 अप्रैल): समुद्री सुरक्षा को सुनिश्चित करने के महत्व पर ज़ोर देते हुए भारत और अमेरिका सैद्धांतिक तौर पर एक समझौते के लिए सहमत हो गए हैं। यह समझौता क्षेत्र में नेवीगेशन और ओवर फ्लाइट के लिहाज़ से काफी अहम माना जा रहा है। जिसमें दक्षिण चीन सागर का क्षेत्र शामिल है।

इस समझौते के तहत दोनों देश सुरक्षा संसाधनों के आदान-प्रदान के लिए भी परस्पर सहमति-पत्र साझा करने के लिए तैयार हो गए हैं। जिससे कि सैन्य सहयोग और तकनीकी स्थानांतरण की दिशा में रास्ता आसान किया जा सके। साथ ही दूसरे समझौतों के लिए भी राह तैयार हो सके।

इस समझौते के तहत दोनों देशों की सेनाएं एक दूसरे की संसाधनों का इस्तेमाल कर सकेंगी। इसके अलावा मरम्मत और आपूर्ति भी आसानी से की जा सकेगी। ये एक ऐसा मसला है, जिसपर पूर्व की यूपीए की सरकार के समय में सहमति नहीं हो पाई थी। हालांकि, रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर और कार्टर ने साफ किया है कि इस समझौते पर कुछ सप्ताह या अगले महीनों में हस्ताक्षर हो जाएंगे। लेकिन यह समझौता अमेरिकी सेना को भारत की जमीन पर तैनाती की मंजूरी नहीं देता।

रिपोर्ट के मुताबिक, रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर और अमेरिकी समकक्ष एस्टन कार्टर ने नियमों पर आधारित आदेश के लिए अपना समर्थन जताया है। जिसमें एशिया-पैसिफिक और भारतीय सागर में शांति और समृद्धि बनाए रखने के लिए क्षेत्रीय सुरक्षा ढ़ांचे का इस्तेमाल किया जा सके। साथ ही आपसी और अन्य देशों के साथ काम करने के लिए प्रतिबद्धता पर ज़ोर दिया जा सके। 

उन्होंने भारत और अमेरिका की सशस्त्र सेनाओं के आपसी सहयोग में आने वाले सालों में बढ़ोतरी के प्रयासों का स्वागत किया है। भारत-अमेरिका के साझा बयान में कहा गया है, "उन्होंने सैन्य अनुबंधों और अभ्यासों में बड़ी जटिलताओं के बीच अपनी सेवाओं को लेकर योजनाओं का स्वागत किय़ा है।"