पाक के कश्मीर राग पर अब कोई ध्यान देने वाला नही: UN में भारत

नई दिल्ली(6 अक्टूबर): एक तरफ पाकिस्‍तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ जहां अपनी जनता के सामने कश्‍मीर और आंतकी बुरहान बुरहान वानी को कश्‍मीर का लाल बता रहे थे, वहीं दूसरी ओर बुधवार को भारत ने संयुक्‍त राष्‍ट्र में इसका सख्‍त जवाब देते हुए कहा कि पड़ोसी देश का नजरिया ''बीते जमाने की बात'' हो चुकी है और अब इस पर ''कोई ध्‍यान देने वाला नहीं है''। संयुक्‍त राष्‍ट्र जनरल असेंबली में बोलते हुए UN में स्‍थायी एंबेसडर सैयद अकबरुद्दीन ने कहा कि भारत दृढ़ता से पाकिस्‍तान को जवाब देता रहेगा।

- उन्‍होंने कहा, ''अपनी निरर्थक इच्‍छा को छोड़ दीजिए। जम्‍मू-कश्‍मीर, भारत का अभिन्‍न हिस्‍सा है और रहेगा। इस मसले पर पाकिस्‍तान के अंतरराष्‍ट्रीय मंचों के दुरुपयोग से वास्‍तविकता नहीं बदलेगी।''

- संयुक्त राष्ट्र के विशेष रूप से सुरक्षा परिषद की कार्यप्रणाली की तीखी आलोचना करते हुए विशेष रूप से अकबरुद्दीन ने कहा, ''इस मुख्य इकाई का मकसद शांति एवं सुरक्षा बरकरार रखने का था लेकिन यह हमारे समय की जरूरतों को लेकर कई तरह से अनुत्तरदायी बन चुकी है और अपने समक्ष खड़ी चुनौतियों से निपटने में निष्प्रभावी है।''

- उन्‍होंने आतंकवाद के मसले पर कहा कि संयुक्‍त राष्‍ट्र अभी तक इस मसले पर एक समग्र नीति अख्तियार नहीं कर पाया है जबकि यह वैश्विक शांति और सुरक्षा के सबसे बड़े खतरों में शामिल है। इसके साथ ही उन्‍होंने यह भी कहा कि 20 वर्षों की बातचीत के बाद भी आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करने या उनके प्रत्‍यर्पण के लिए कोई अंतरराष्‍ट्रीय मानक तय नहीं हो पाए हैं। उन्‍होंने कहा, ''द्वितीय विश्‍व युद्ध के बाद देशों और समाजों के सामने सबसे बड़े खतरों में शुमार आतंकवाद की चुनौती से निपटने में नाकामी हमारे संगठन की प्रासंगिकता पर सवालिया निशान खड़े करती है।''

- सैयद अकबरुद्दीन का बयान से पहले इसी मंच से चंद रोज पहले विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज ने पाकिस्‍तान को सख्‍त संदेश दिया था।  इसी मंच का इस्‍तेमाल करते हुए पाकिस्‍तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने अंतरराष्‍ट्रीय हस्‍तक्षेप की अपील की थी जिसे मोटे तौर पर अंतरराष्‍ट्रीय समुदाय ने नजरअंदाज कर दिया।