भारत-वियतनाम के बीच हुए इस करार से चिढ़ सकता है चीन

नई दिल्ली ( 6 दिसंबर ): अगले साल से भारत वियतनाम के फाइटर पायलट्स को 'सुखोई-30 एमकेआई' को उड़ाने की ट्रेनिंग देगा। भारत पहले ही वियतनाम की नेवी को किलो-क्लास सबमरीन के ऑपरेशन की ट्रेनिंग दे रहा है। भारत और वियतनाम के बीच बढ़ती नजदीकी से चीन चिढ़ सकता है। गौरतलब है कि दक्षिण चीन सागर विवाद की वजह से वियतनाम और चीन के रिश्ते तल्ख हैं।

वियतनाम के फाइटर पायलट्स को सुखोई विमान उड़ाने की ट्रेनिंग से जुड़ा समझौता सोमवार को हुआ। रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर और उनके वियतनामी समकक्ष जनरल एन. जुआन लिच ने इस समझौते पर दस्तखत किए। जनरल लीच 30 सदस्यीय सैन्य प्रतिनिधिमंडल के साथ 3 दिनों के भारत दौरे पर आए हैं। उनके साथ वियतनाम के एयर फोर्स और नेवी के प्रमुख भी आए हैं। इस समझौते पर 2013 में ही सहमति बन गई थी लेकिन कुछ वजहों से करार नहीं हो पाया था।

सितंबर में प्रधानमंत्री मोदी के वियतनाम दौरे पर इस समझौते को अंतिम रूप देने की तैयारी हुई थी। तब दोनों देशों में 2007 में हुए द्विपक्षीय 'रणनीतिक साझेदारी' को और आगे उठाने पर सहमति हुई थी। वास्तव में एशिया-प्रशांत क्षेत्र में चीन के आक्रामक रुख से भारत और वियतनाम दोनों ही चिंतित हैं और धीरे-धीरे मिलिट्री ट्रेनिंग और डिफेंस टेक्नॉलजी के क्षेत्र में आपसी सहयोग बढ़ा रहे हैं। इसके साथ ही दोनों देश दक्षिण चीन सागर में संयुक्त रूप से तेल खोजने का अभियान चला रहे हैं।

इसके बाद भारत और वियतनाम के रक्षा सचिव 2017 की शुरुआत में मुलाकात करेंगे। दरअसल प्रधानमंत्री मोदी ने अपने वियतनाम दौरे पर उसे 50 करोड़ डॉलर के सैन्य मदद का ऐलान किया था। दोनों देशों के रक्षा सचिव अपनी मुलाकात में उन प्रॉजेक्ट और उपकरणों की पहचान करेंगे जिस पर ये राशि खर्च की जाएगी।

भारत ने वियतनाम को ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल देने तक की पेशककश की है। इसके अलावा भारत ने वियतनाम को ऐंटी-सबमरीन टॉरपिडो वरुणास्त्र और दूसरे मिलिट्री हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के निर्यात का प्रस्ताव दिया है।