BrahMos बनेगी और घातक- भारत के इस 'ब्रह्मास्त्र' से घबराया चीन, पाकिस्तान की उड़ी नींद

डॉ. संदीप कोहली,

नई दिल्ली (15 फरवरी): रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन यानी DRDO दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल 'BrahMos' की मारक क्षमता 290KM से बढ़ाकर 450KM करने की तैयारी कर रहा है। DRDO प्रमुख एस क्रिस्टोफर ने बुधवार को यह खुलासा किया। BrahMos मिसाइल की रेंज बढ़ाकर इसका पहला परीक्षण 10 मार्च के आसपास किया जा सकता है। शुरूआत में BrahMos की रेंज 450KM होगी जिसको अगले ढाई साल में बढ़ाकर 800KM तक विकसित किया जाएगा। BrahMos की स्पीड करीब एक किलोमीटर प्रति सेकेंड है इस हिसाब से दिल्ली से इस्लामाबाद की 680 किमी की दूरी ये मिसाइल 11 मिनट 30 सेकेंड में पूरी कर लेगी। चीन के पास मौजूद मिसाइल YJ-62 सुपरसोनिक नहीं सबसोनिक है जिसकी स्‍पीड 290 मीटर प्रति सेकेंड है। आम भाषा में समझे तो ब्रह्मोस चीनी मिसाइल से तीन गुना तेज है। पाकिस्तान की क्रूज मिसाइल Ra'ad अभी विकास के चरण में ही है।

BrahMos दुनिया की एकमात्र मिसाइल है जिसको जमीन, आसमान, जल और पानी के अंदर पनडुब्बियों से प्रक्षेपित किया जा सकता है। पिछले साल अक्‍टूबर में BRICS सम्‍मेलन के दौरान भारत और रूस में BrahMos के आधुनिक संस्‍करण बनाने को लेकर करार हुआ था। रूस द्वारा भारत के साथ किए गए इस समझौते के पीछे एक अहम कारण था, क्योंकि भारत मिसाइल कंट्रोल रिजिम यानी MTCR में शामिल हो गया था और MTCR के नियम के मुताबिक सदस्य देश ही आपस में मिलकर 300KM की रेंज से ऊपर की मिसाइल बना सकते हैं जो देश MTCR का सदस्य नहीं है उसके साथ ऐसी मिसाइल का निर्माण नहीं किया जा सकता। चीन से मुकाबला करने के लिए BrahMos मिसाइल पूर्वोत्तर में तैनात की जा चुकी है। केंद्र सरकार ने सेना को पूर्वोत्तर में चीन के खिलाफ पारस्परिक शक्ति संतुलन बनाने के लिए ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल के अत्याधुनिक संस्करण को तैनात करने की मंजूरी दे दी थी। यह मिसाइल चीन के साथ लगी 4,057 किमी लंबी सीमा पर पड़ोसी देश की तरफ से बढ़ाए जा रहे सैन्य ताकत का मुकाबला करने में सक्षम है।

सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल- ब्रह्मोस

वजन-3,000 KG(सेना और नौसेना), 2,500 KG(वायुसेना)

गति-2.8 मैक (3,400 किमी) से 3.0 तक (3,700 किमी)

लंबाई-8.4 मीटर

व्यास-0.6 मीटर

वारहेड-250 KG पारम्परिक, 300 KG न्यूक्लियर वॉर-हेड

उड़ान सीमा-290-300 किमी तक

उड़ान ऊंचाई-अधिक 14 किमी ((46,000 फीट)

ब्रह्मोस मिसाइल की खासियत

- यह हवा में ही मार्ग बदल सकती है और चलते फिरते लक्ष्य को भी भेद सकती है।

- इसको वर्टिकल या सीधे कैसे भी प्रक्षेपक से दागा जा सकता है।

- यह मिसाइल तकनीक थलसेना, जलसेना और वायुसेना तीनों के काम आ सकती है।

- यह 10 मीटर की ऊँचाई पर उड़ान भर सकती है और रडार की पकड में नहीं आती।

- रडार ही नहीं किसी भी अन्य मिसाइल पहचान प्रणाली को धोखा देने में सक्षम है। इसको मार गिराना लगभग असम्भव है।

- ब्रह्मोस अमरीका की टॉम हॉक से लगभग दुगनी अधिक तेजी से वार कर सकती है, इसकी प्रहार क्षमता भी टॉम हॉक से अधिक है।

- आम मिसाइलों के विपरित यह मिसाइल हवा को खींच कर रेमजेट तकनीक से ऊर्जा प्राप्त करती है।

- यह मिसाइल 1200 यूनिट ऊर्जा पैदा कर अपने लक्ष्य को तहस नहस कर सकती है।

- ब्रह्मोस मिसाइल दो इंधन से चलती है प्रथम चरण में solid propellant booster और दूसरे चरण में liquid-fueled ramjet होता है।

- पहले चरण में Solid propellant booster इंजन को सुपरसोनिक गति प्रदान करता है और फिर अलग हो जाता है

- जबकि दूसरे चरण का liquid-fueled ramje मिसाइल को क्रूज चरण में 3 मैक तक ले जाता है।

- ब्रह्मोस मिसाइल स्टील्थ (Stealth) प्रौद्योगिकी के साथ निर्देशन प्रणाली से युक्त है, मिसाइल ‘दागो और भूल जाओ’ सिद्धांत पर कार्य करती है।

- ब्रह्मोस मिसाइल की क्रूजिंग एल्टीट्यूड 15 किमी. तक हो सकता है और इसका टर्मिनल एल्टीट्यूड न्यूनतम 10 मीटर है।

2024 तक आएगा ब्रह्मोस का हाइपरसोनिक वर्जन 'ब्रह्मोस-II'

- ब्रह्मोस के सुपरसोनिक वर्जन के अलावा ब्रह्मोस हाइपरसोनिक वर्जन की भी तैयारी हो रही है।

- ब्रह्मोस-II की यह मिसाइल हाइपरसोनिक गति से उड़ान भरेगी, इसकी गति ध्वनि से 7 गुना अधिक होगी।

- हाइपरसोनिक गति पर ब्रह्मोस-II 8,575 किमी प्रति घंटा और 2.3 किमी प्रति सेकेंड की रफ्तार से उड़ेगी।

- ध्वनि की गति से पांच से दस गुना के बीच की रफ्तार को हाइपर सोनिक कहा जाता है।

- ध्वनि से सात गुना अधिक गति होने के कारण यह अपने लक्ष्य पर सामान्य वारहेड की अपेक्षा तीस गुना अधिक मारक क्षमता से मार कर सकेगी।

- ब्रह्मोस-II का पहला टेस्ट 2017 में होने की उम्मीद है, 2024 तक तीनों सेनाओं में शामिल किया जा सकता है।

ब्रह्मोस नाम कैसे पड़ा...

- 12 फरवरी, 1998 को मॉस्को में भारत और रूस के बीच एक समझौता हुआ था।

- भारत के शीर्ष रक्षा वैज्ञानिक और पूर्व राष्ट्रपति स्व.एपीजे अब्दुल कलाम और रूस के उपरक्षामंत्री मिखाइलोव के बीच हुआ था समझौता।

- समझौते के तहत भारत के DRDO और रूस की NPO के मध्य एक संयुक्त उपक्रम ‘ब्रह्मोस एयरोस्पेस’ की स्थापना हुई।

- इस साझेदारी का उद्देश्य विश्व की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस का डिजाइन, विकास, विनिर्माण और बिक्री करना था।

- ब्रह्मोस मिसाइल का नामकरण भारत की ब्रह्मपुत्र नदी 'ब्रह्म' और रूस की मोस्कोवा नदी 'मोस' के नाम पर किया गया है।

- ब्रह्मोस मिसाइल का पहला सफल परीक्षण 12 जून, 2001 को अंतरिम परीक्षण रेंज, चांदीपुर, ओडिशा से किया गया था।

- साल 2005 में भारतीय नौसेना में ब्रह्मोसके पहले संस्करण को शामिल किया गया।

- भारतीय सेना में भी ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की तीन रेजीमेंटों को शामिल किया गया है।

क्या होती है क्रूज मिसाइल...

- मुख्य रूप से मिसाइल दो प्रकार के होते हैं: क्रूज मिसाइल और बैलेस्टिक मिसाइल।

- एक क्रूज मिसाइल मानव-रहित, सेल्फ प्रोपेल्ड यानी स्वचालित गाइडेड वेहिकल है।

- क्रूज मिसाइल को मुख्यत अपने लक्ष्य पर सटीकता से दागने के लिए किया जाता है।

- मिसाइल जेट टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर पृथ्वी के वायुमंडल के दायरे में उड़ान भरती है।

- आकार, स्पीड, रेंज और सतह, वायु, समुद्र, पनडुब्बी में से लांच किया जा सकता है।

सबसोनिक क्रूज मिसाइल : इसकी रफ्तार ध्वनि की रफ्तार से कम होती है। इसकी स्पीड तकरीबन 0.8 मैक (988 किमी प्रति घंटा) है। इस श्रेणी में सबसे लोकप्रिय मिसाइल अमेरिकी टॉमहॉक क्रूज मिसाइल है। इसके अलावा, अमेरिका के हारपून और फ्रांस के एक्सोसेट और रूस की कैलिबर क्रूज मिसाइल है।

 

सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल : यह मिसाइल 2 से 5 मैक (1,482 से 6,174 किमी प्रति घंटा) की स्पीड से भागती है। यानी इसकी गति प्रत्येक एक सेकेंड में एक किलोमीटर। मिसाइल वॉरशिप, सबमरिन, एयरक्राफ्ट और लॉन्चर से लांच की जा सकती है।‘बह्मोस’ को सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल सिस्टम का एकमात्र उदाहरण माना जाता है।

 

हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल : यह मिसाइल 5 मैक (6,174 से 12,348 किमी प्रति घंटा) से ज्यादा की रफ्तार से अपने लक्ष्य पर पहुंचने में सक्षम है। फिलहाल अनेक देश इस श्रेणी के मिसाइल को विकसित करने में जुटे हुए हैं। ब्रह्मोस एयरोस्पेस भी हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल को विकसित करने की प्रक्रिया में जुटा हुआ है। इसे ब्रह्मोस-2 नाम दिया गया है, जो 5 मैक से ज्यादा की स्पीड से उड़ान भरने में सक्षम है।