MTCR मिसाइल ग्रुप में शामिल हुआ भारत, ड्रोन से होगी पाक और चीन सीमा की निगरानी

नई दिल्ली (27 जून): भारत मिसाइल प्रोद्योगिकि नियंत्रण व्यवस्था यानी एमटीसीआर का पूर्ण सदस्य बन गया है। एमटीसीआर में भारत की सदस्यता किसी भी बहुपक्षीय निर्यात नियंत्रण व्यवस्था में भारत का पहला प्रवेश है।

अब ड्रोन से होगी पाकिस्तान और चीन की सीमा पर पैनी नज़र, अब ड्रोन से होगा नक्सलियों और आतंकवादियों का ख़ात्मा, क्योंकि आज भारत के इतिहास में वो होने जा रहा है जिसका इंताजर लंबे समय से था। भारत भी उन शक्तिशाली देशों के बराबर खड़ा हो जाएगा जिनकी ताकत का दुनिया लोहा मानती है।

भारत उस ड्रोन का मालिक बन जाएगा जो सिर्फ फोटो नहीं खींचता बल्कि अपने दुश्मनो पर मिसाइल भी दागता है, क्योंकि अब भारत को वो तमाम चीजें खरीदने या साझा करने की इजाजत होगी जिसें दुनिया के 34 महान देश साझा करते हैं। भारत आज 34 देशों वाले एमटीसीआर का सदस्य बन गया है। यानी भारत अब आसानी से आधुनिक मिसाइल से लेकर खतरनाक ड्रोन तक सदस्य देशों से खरीद सकेगा। भारत अब उस टेबल पर बैठकर बात करेगा जहां दुनिया के आधुनिक मिसाइल टेक्नॉलजी से लैस देशों के प्रतिनिधि बैठते हैं और ये भारत के लिए फख्र की बात है।

भारत की इस कामयाबी के पीछे है ओबामा और मोदी की दोस्ती का हाथ है। भारत के मित्र अमेरिका ने MTCR देशों के ग्रुप में शामिल होने पर भारत का समर्थन किया था। अब भारत की नज़र एक बाज़ की तरह ड्रोन पर है। सूत्रों के मुताबिक बहुत जल्द भारत अमेरिका से 40 ड्रोन विमान खरीद सकता है। 

अब सवाल उठता है कि जिस ड्रोन की हम बात कर रहे हैं वो ड्रोन आखिर क्या है। ड्रोन रिमोट या कम्प्यूटर से चलने वाला पायलट रहित विमान है। अमेरिका के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा मानव रहित विमान बनाया है। जिसमें खतरनाक मिसाइल फिट की जा सकती हैं.. और दुश्मन के ठिकानों को नेस्तेनाबूद किया जा सकता है।

क्या है ड्रोन ? लम्बाई- 27 फीट पंखों की चौड़ाई- 49 फीट ऊंचाई- करीब 7 फीट खाली विमान का वज़न- 512 किलोग्राम मिसाइल के साथ वज़न- 1020 किलोग्राम उड़ान की लेंथ- मिसाइल के साथ 300 किमी. अधिकतम रफ्तार- 217 किमी./घंटा

यानी ये ड्रोन विमान सिर्फ जमीन ही नहीं, समंदर में भी दुश्मन की निगरानी कर सकेंगे। भारतीय सेना के साथ-साथ नेवी के लिए भी ये काफी कारगर साबित होगा। ये ड्रोन 35 घंटे तक लगातार आसमान में चक्कर लगाते हुए समंदर पर नजर रखेंगे। ऐसे में जब चीन की समंदर में हरकत तेज हो गई हैं, तो ऐसे पायलट रहित ड्रोन विमान बहुत काम आएंगे।