ताइवानी डेलीगेशन के दौरे में चीन राजनीतिक अर्थ न निकाले: भारत

नई दिल्ली ( 16 जनवरी ): ताइवान के संसदीय प्रतिनिधिमंडल के दौरे पर बौखलाए चीन ने भारत के सामने तीखा विरोध जताया था। चीन के विरोध के बाद भारत ने इस ग्रुप को 'अनाधिकारिक' करार दिया है। चीनी विरोध पर जवाब देते हुए भारत सरकार ने कहा कि अनाधिकारिक ग्रुप के दौरे के राजनीतिक अर्थ नहीं निकाले जाने चाहिए।

ताइवान की महिला सांसदों के भारत दौरे को लेकर चीन ने नई दिल्ली से कहा था कि उसे ताइवान के साथ संबंधों में 'सावधानी' बरतनी चाहिए। पिछले सप्ताह ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी चीन की 'वन चाइना पॉलिसी' को सही करार दिया था, जबकि पहले वह इसके खिलाफ थे। इस पॉलिसी के तहत चीन पड़ोसी देश ताइवान को भी अपना ही हिस्सा मानता है।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि ताइवान से आए इस ग्रुप में अकादमिक विद्वान, कारोबारी, धार्मिक हस्तियां और 'कुछ' सांसद शामिल हैं। मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने कहा, 'इस तरह के अनाधिकारिक ग्रुप्स की भारत की यात्रा पूरी तरह पर्यटन के उद्देश्य से है।' स्वरूप ने कहा, 'इस विजिट में कुछ भी नया नहीं है और इसके कोई राजनीतिक अर्थ नहीं निकालने चाहिए।'

भारत की यह प्रतिक्रिया चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनकी सरकार ने ताइवानी संसदीय प्रतिनिधिमंडल की मेजबानी करने को लेकर कूटनीतिक विरोध दर्ज कराया था। गेंग ने कहा था, 'हमने चीन और ताइवान के साथ कूटनीतिक संबंध रखने वाले देशों की ओर से ताइवान के साथ आधिकारिक संपर्क का हमेशा विरोध किया है। इसके अलावा हम किसी आधिकारिक संस्थान की स्थापना के भी खिलाफ रहे हैं।' गेंग ने कहा कि भारत की ओर से ताइवान के साथ संबंधों को लेकर हमें आश्वस्त किया गया था।