गिलगित-बाल्टिस्तान हड़पने की तैयारी में पाकिस्तान- भारत ने दी कड़ी चेतावनी

डॉ. संदीप कोहली,

नई दिल्ली (16 मार्च): पाकिस्तान गिलगिट-बल्तिस्तान की आवाम को सबसे बड़ा धोखा देने वाला है। पाकिस्तान गिलगिट-बल्तिस्तान पर कब्जे की तैयारी कर रहा है। गिलगिट-बाल्टिस्तान जो अब तक पाक अधिकृत कश्मीर की तरह पाकिस्तान का ऑटोनॉमस रीजन यानी स्वायत्त क्षेत्र था अब पाकिस्तान इसे अपना पांचवां सूबा बनाने जा रहा है। न्यूज24 बेवसाइट ने 18 फरवरी को यह खबर प्रकाशित की थी। उस पर पाकिस्तान के अंतर प्रांतीय समन्वय मंत्री रियाज हुसैन पीरजादा ने 14 मार्च को मोहर लगा दी। पीरजादा ने जियो टीवी को दिए इंटरव्यू में इसका खुलासा करते हुए बताया कि विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज की अध्यक्षता में एक समिति ने गिलगित-बाल्तिस्तान को प्रांत का दर्जा देने का प्रस्ताव दिया है। समिति ने सिफारिश की है कि गिलगित-बाल्तिस्तान को पाकिस्तान का प्रांत बनाना चाहिए। इस पर गुरूवार को भारत के विदेश मंत्रालय ने कड़ा रूख अख्तियार करते हुए पाकिस्तान को चेतावनी दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गोपाल बागले ने कहा है कि हम मीडिया रपटों पर कॉमेंट नहीं करेंगे, लेकिन जम्मू-कश्मीर पर हमारा रुख साफ है। यह भारत का अंग था, है और रहेगा। इस स्थिति को बदलने की कोई भी कोशिश हमें मंजूर नहीं होगी। पाकिस्तान ने यह कदम ऐसे मौके पर उठाया है जब एशियाई पार्लियामेंटरी असेंबली की बैठक में भाग लेने भारत के तीन नेता पाकिस्तान गए हुए हैं।

पाकिस्तानी अखबार डॉन ने भी पिछले साल एक खबर छापी थी जिसके मुताबिक, गिलगिट-बाल्टिस्तान को पाकिस्तान का हिस्सा घोषित करने के लिए संविधान संशोधन की नवाज सरकार तैयारी कर रही है। खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान ऐसा चीन के दबाव में कर रहा है और ये सब हो रहा है चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर यानी CPEC के लिए। चीन CPEC के तहत 3 हजार किमी का रेल-सड़क नेटवर्क तैयार कर रहा है। जो पश्चिमी चीन से दक्षिणी पाकिस्तान को जोड़ देगा। चीन का ये कॉरिडोर गिलगित-बाल्टिस्तान से गुजरता है। गिलगित-बाल्टिस्तान की जनता चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर का विरोध करती रही है। उनका आरोप है कि दोनों देश अपने-अपने फायदे के लिए इस इलाके के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कर रहे हैं। साथ ही चीन ने इलाके पर कब्जे के लिए अपने 21 हजार सैनिकों और हजारों कामगारों को यहां बसा रखा है। पिछले साल अगस्त में गिलगिट-बल्टिस्तान और पीओके के लोगों ने पाकिस्तान और चीन के खिलाफ बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन भी किए थे। जिसे पाकिस्तान ने दमनचक्र चलाकर कुचल दिया था।

गिलगिट-बाल्टिस्तान का इतिहास...

    * गिलगिट-बाल्टिस्तान 1846 से ही जम्मू-कश्मीर के डोगरा राजाओं के कब्जे में रहा है।

    * 1947-48 में पाकिस्तान ने कश्मीर के जिस हिस्से पर कब्जा किया उनमें गिलगिट-बल्टिस्तान भी है।

    * कब्जे वाले कश्मीर को दो हिस्सों में बांटा, जिनमें एक PoK और दूसरा गिलगिट-बल्टिस्तान बना।

    * पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर के इन दोनों हिस्सों को पाकिस्तान स्वायत्त क्षेत्र कहता है।

    * दोनों क्षेत्रों की अपनी-अपनी विधानसभाएं हैं और तकनीकी रूप से पाकिस्तान संघ का हिस्सा नहीं हैं।

    * जबकि हकीकत है कि दोनों क्षेत्रों में पाक सरकार और आर्मी की कठपुतली सरकारें ही काम करती हैं।

    * पाकिस्तान सुन्नी बहुल है जबकि गिलगित-बल्तिस्तान की आबादी शिया बाहुल्य है।

    * गिलगित बाल्तिस्तान की सीमाएं, चीन और अफगानिस्तान के अलावा जम्मू कश्मीर से जुड़ी हुई हैं।

    * चीन इस इलाके के खनिजों और पनबिजली संसाधनों के दोहन के लिए बड़े पैमाने पर निवेश किया।

    * पाकिस्तान के साथ मिलकर यहां रेल कॉरिडोर और अन्य प्रोजेक्ट लाया जिसे भारत ने अवैध बताया।

    * पाकिस्तान चीन की गतिविधियों का यहां के लोग जब भी विरोध करते हैं तो सेना इसे कुचल देती है।

    * चीन-पाकिस्तान गलियारे का विरोध करने वालों पर आतंकवाद रोधी कानून लगाया जाता है।

कैसे गिलगिट-बल्टिस्तान की शिया आबादी का हुआ दमन...

    * पाकिस्तान सुन्नी बहुल देश है जबकि गिलगित-बल्तिस्तान की आबादी शिया बाहुल्य है।

    * गिलगित-बल्तिस्तान में 60 फीसदी शिया बसते हैं 30 फीसदी सूफी और केवल 10 फीसदी सुन्नी हैं।

    * सबसे कट्टर इस्लामिक राष्ट्रपतियों में से एक जिया-उल हक ने मार्शल लॉ के दौर में यहां कत्लेआम मचाया।

    * 1982 के बाद से ही यहां सांप्रदायिक हिंसा का दौर जारी है।

    * 1988 में पाक सेना ने यहां कई शिया प्रदर्शनकारियों को जिंदा जला दिया था।

    * 1996 में बाहरी लोगों को बसाने का विरोध कर रहे शियाओं पर पाक सेना ने फायरिंग की।

    * यहां पहली बार 1994 में चुनाव हुए, जिसके बाद 26 सदस्यीय काउंसिल का गठन हुआ।

    * मार्च 1995 में काउंसिल के पास से कानून पारित करने का अधिकार छिन लिया गया।

    * क्योंकि काउंसिल में शिया बड़ी तादात में थे इसलिए उनसे अधिकार छिन लिए गए।

पूरे क्षेत्र की डेमोग्राफी बदलने में जुटा है पाकिस्तान...

    * गिलगित-बल्तिस्तान में पाकिस्तान के विरोध को देख पाक सरकार और सेना ने रणनीति बदली।

    * स्थानीय लोगों को अल्पसंख्यक बनाने की नीति के तहत साजिशे रची गई।

    * गिलगित-बल्तिस्तान की आबादी के संतुलन को पूरी तरह अपने पक्ष में कर लिया।

    * पाकिस्तान ने गिलगित और स्कर्दू में बड़े पैमाने पर बाहरी लोगों को जमीन आवंटित कीं।

    * यह यूनाइटेड नेशंस कमिशन फॉर इंडिया ऐंड पाकिस्तान के प्रस्तावों का उल्लंघन था।

    * बाहरी लोग (पाकिस्तानी) स्थानीय समुदायों की अपेक्षा आर्थिक तौर पर समृद्ध हैं।

    * सरकार और सेना के सहयोग से गिलगित-बल्तिस्तान के स्थानीय नागरिकों का उत्पीड़न कर रहे हैं।

    * 2001 की जनगणना के मुताबिक बाहरी और स्थानीय लोगों की जनसंख्या का अनुपात 3:4 हो गया।

    * बाहरी और स्थानीय लोगों की जनसंख्या का अनुपात 90 के दशक में 1:4 था।

    * पंजाबी और पख्तून मूल के लोगों की तेजी से बढ़ती आबादी के चलते स्थानीय लोग असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

ऑटोनॉमस रीजन होने के बावजूद इस्लामाबाद से चलता है शासन...

    * स्वायत्त क्षेत्र होने के बावजूद गिलगित-बाल्टिस्तान की सत्ता पाक सेना और सरकार चलाती है।

    * गिलगित-बाल्टिस्तान से संबंधित निर्णय का अधिकार सिर्फ कश्मीर नॉर्दन एरियाज अफेयर्स मिनिस्ट्री के पास है।

    * इसका मुखिया इस्लामाबाद में स्थिति पाक सरकार का जॉइंट सेक्रटरी होता है।

    * जिसके पास सभी मामलों के निपटारे की ताकत होती है।

    * यहां की सिविल, पुलिस और सुरक्षा सेवाओं में पाकिस्तानियों को ही नियुक्ति दी जाती है।

    * न्यायिक आयुक्त की ओर से सुनाया गया कोई भी फैसला यहां अंतिम होता है।

CPEC के तहत चीन के किया गिलगिट-बाल्टिस्तान पर कब्जा...

    * चीन ने सीपीईसी परियोजनाओं में 46 अरब डॉलर यानी लगभग 3 लाख करोड़ रुपए निवेश किया है।

    * इस प्रोजेक्ट की शुरूआत 2015 में हुई थी, इसके पूरा होने तक 3 हजार किमी का रेल-सड़क नेटवर्क तैयार हो जाएगा।

    * सड़क नेटवर्क तैयार के साथ-साथ रेलवे और पाइपलाइन लिंक भी पश्चिमी चीन से दक्षिणी पाकिस्तान को जोड़ेगा।

    * अभी चीन को ग्वादर पोर्ट जाने के लिए 12 हजार किमी के समुद्री मार्ग से सफर तय करना पड़ता है।

    * सीपीईसी प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद चीन को अपने बॉर्डर से सिर्फ 1800 किमी का सफर तय करना पड़ेगा।

    * बीजिंग से ग्वादर पोर्ट की दूसरी महज आधी से भी कम (5200 किमी) रह जाएगी।

    * चीन द्वारा बनाया जा रहा ये कॉरिडोर बलूचिस्तान प्रांत से होकर गुजरेगा, जहां दशकों से लगातार अलगाववादी आंदोलन चल रहे हैं।

    * इसके साथ-साथ गिलगिट-बल्टिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर का इलाका भी शामिल है।

    * सीपीईसी, चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग के सिल्क रोड इकोनॉमिक बेल्ट और 21वें मेरीटाइम सिल्क रोड प्रोजेक्ट का हिस्सा है।

    * चीन को उम्मीद है कि इस कॉरिडोर के जरिए वह अपनी ऊर्जा को तेजी से फारस की खाड़ी तक पहुंचा सकता है।

    * चीन की योजना इन दोनों विकास योजनाओं को एशिया और यूरोप के देशों के साथ मिलकर आगे बढ़ाने की है।

    * वहीं, कॉरिडोर के जरिए पश्चिमी चीन में वित्तीय विस्तार मिलने की उम्मीद है, जो कि बंद इलाका है।

    * इसके साथ-साथ चीन की योजना अपने गिलगिट-बल्टिस्तान में अपने पैर जमाने की है,जहां लगातार अलगाववादी आंदोलन हो रहे हैं।

    * सीपीईसी प्रोजेक्ट के लिए पाकिस्तान में मौजूद चीनी नागरिकों की सुरक्षा के लिए करीब 21 हजार पाकिस्तानी सैनिक तैनात किए गए हैं।

    * अगस्त में गिलगिट-बल्टिस्तान और पीओके लोगों ने पाकिस्तान और चीन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू किया गया है।

    * वहां के नागरिकों का आरोप है कि दोनों देश अपने फायदे के लिए इस इलाके के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कर रहे हैं।

    * नागरिकों का आरोप है कि इस योजना में चीन के कामगारों को लगाया गया है, जबकि स्थानीय युवा बेरोजगार हैं।