अब और डरेगा पाकिस्तान, भारत-रूस का अहम समझौता, मजबूत हुई वायु सेना

नई दिल्ली (18 मार्च): वायुसेना की सबसे बड़ी ताकतों में से एक सुखोई-30 लड़ाकू विमानों को फिट बनाए रखने के लिए बड़ी पहल की गई है। कम से कम 7 हादसों का शिकार हो चुके इन विमानों के रखरखाव के लिए रूसी कंपनियों से लॉन्ग टर्म सपोर्ट अग्रीमेंट किया गया है। बुधवार को राजस्थान के बाड़मेर में एक सुखोई 30 विमान क्रैश हो गया था। 2014 से 2016 के बीच 34 बार हवा में इनके इंजन फेल होने के मामले सामने आ चुके हैं। भारतीय वायुसेना में इन विमानों की संख्या 200 से ज्यादा है।


भारत ने रूस से 272 सुखोई विमानों के लिए कॉन्ट्रैक्ट कर रखा है, जिनका लाइसेंस के तहत प्रॉडक्शन हिन्दुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) कर रहा है। काफी महंगे इन विमानों को साल 2000 के आसपास वायुसेना के लिए खरीदने का काम शुरू किया गया था और 2019 तक सभी विमान शामिल होने की उम्मीद है।

हाल में एरो इंडिया शो के दौरान रूसी पक्ष ने इंजन पर भारत में उठ रही शंकाओं को खारिज किया था। इनके हादसों की वजहों में जानकार मेंटिनेंस में समस्या भी बताते हैं। इनके पुर्जों की सप्लाई समय पर नहीं हो पाती है।

रक्षा मंत्री अरुण जेटली और रूस के कारोबार मंत्री डेनिस मंतुरोव की मौजूदगी में एचएएल ने रूसी कंपनियों से दो समझौतों पर शुक्रवार को साइन किए, जिसके तहत पांच साल तक इन विमानों के पुर्जों की सप्लाई और तकनीकी सहायता के नियम-शर्तों को तय किया गया है।