चीन के मुकाबले भारत में दोगुनी रफ्तार में बढ़ रही है आबादी

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (10 अप्रैल): संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष यानी UNFPA की 'स्टेट ऑफ वर्ल्ड पॉपुलेशन 2018 रिपोर्ट' के मुताबिक भारत की आबादी 1.2 फीसदी की दर से बढ़ रही है। UNFPA की रिपोर्ट के मुताबिक 2010-19 के बीच हर साल भारत की आबादी 1.2 फीसदी की दर से बढ़ी। वहीं वैश्विक स्तर पर इस दौरान जनसंख्या वृद्धि दर 1.1 फसदी रही। जबकि इस अविधि में चीन की सालाना जनसंख्या वृद्धि दर 0.5 फीसदी रही है। लिहाजा 2010-19 के बीच भारत की जनसंख्या वृद्धि दर चीन से दोगुना रही। रिपोर्ट के मुताबिक 2019 में दुनिया की आबादी 7.7 अरब हो गई है। यह आबादी 2018 में 7.6 अरब थी। वहीं चीन की आबादी 142 करोड़ है। जबकि भारत की आबादी 136 करोड़ हो गई है। औसत उम्र के मामले में भी भारत चीन से पीछे है। भारत में औसत उम्र 69 साल है, वहीं चीन के नागरिकों की औसत उम्र 77 साल है। जबकि वैश्विक औसत 72 साल है।UNFPA की रिपोर्ट के मुताबिक अर्ध विकसित देशों में जनसंख्या वृद्धि दर ज्यादा रही। अफ्रीकी देशों में सालाना जनसंख्या वृद्धि दर 2.7 फीसदी रहा है। UNFPA के अनुमान के मुताबिक 2050 तक वैश्विक जनसंख्या में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी अफ्रीकी देशों और अधिक जनसंख्या वाले देशों जैसे भारत और नाइजीरिया में होगी। UNFPA की रिपोर्ट के मुताबिक भारत की 24 राज्यों में रहने वाली करीब आधी जनसंख्या में प्रति महिला 2.1 प्रजनन दर है। लेकिन माना जा रहा है कि ये अच्छा संकेत नहीं है। आने वाले समय में जनसंख्या में इजाफा ही होना है। आपको बता दें कि UNFPA को स्थापित हुए पचास साल हो गए हैं। इसकी स्थापना प्रजनन स्तर नीचे लाने के लिए देशों का समर्थन करने के उद्देश्य से हुई थी।  UNFPA इंडिया के इन चार्ज क्लॉस बैक का कहना है, कि भारत को बढ़ती उम्र की आबादी के लिए तैयार रहना होगा। यह सुनिश्चित करके की युवाओं को बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य मिले और अर्थव्यवस्था विकसित करना होगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के पास अभी भी बाकी देशों से सीखने का समय है। सबसे गरीब 20 फीसदी घरों में गर्भनिरोधक और प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं की सबसे बड़ी आवश्यकता है। वहीं चीन जैसे देशों में जनसंख्या कम करने के लिए जो नीतियां अपनाई गई हैं, उनसे काफी सुधार हुआ है। ये रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब 25 साल पहले जनसंख्या और विकास पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन (1994 में हुआ था। इस सम्मेलन में 179 सरकारें जनसंख्या वृद्धि को संबोधित करने के लिए यौन और प्रजनन स्वास्थ्य के अधिकार-आधारित दृष्टिकोण पर सहमत हुई थीं। वहीं 1994 के बाद से मातृ मृत्यु दर में भी 40 फीसदी की गिरावट आई है।