भारत की इस स्वदेशी परमाणु पनडुब्‍बी से डरा पाक

नई दिल्‍ली (23 फरवरी): भारत की पहली न्यूक्लियर आर्म्ड सबमरीन ‘आईएनएस अरिहंत’ अब ऑपरेशन के लिए तैयार है। सरकार की मंजूरी के बाद इसे ऑफिशियली नेवी को सौंप दिया जाएगा। खास बात यह है कि अरिहंत को अब तक दुनिया की नजरों से दूर रखा गया है। हाल ही में इसने तमाम टेस्ट कामयाबी के साथ पूरे किए। पांच महीने तक समंदर में चले सफल परीक्षण के बाद इसे हरी झंडी दिखा दी गई है। पहली स्वदेशी परमाणु पनडुब्‍बी है, जो कि बैलिस्टिक मिसाइल दागने की क्षमता रखती है।

आईएनएस अरिहंत की ताकत इस पर K-15 या बीओ-5 शॉर्ट रेंज मिसाइलें तैनात हैं। जो 700 किलोमीटर तक टारगेट हिट कर सकती हैं। अरिहंत पनडुब्बी K-4 बैलिस्टिक मिसाइलों से भी लैस है। इनकी रेंज 3500 किलोमीटर तक है। ये 6 हजार टन वजनी न्यूक्लियर सबमरीन है। इससे पानी के अंदर और पानी की सतह से न्यूक्लियर मिसाइल दागी जा सकती है। पानी के अंदर से किसी एयरक्राफ्ट को भी यह निशाना बना सकती है।

हाल ही में विशाखापट्टनम में इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू का आयोजन जब हुआ था। तब इसमें कई देशों की नेवी ने हिस्सा लिया था। लेकिन एक्सपर्ट्स के मुताबिक, भारत ने इस प्रोग्राम में अपनी अदृष्यम ताकत INS अरिहंत को इसलिए शामिल नहीं किया, क्योंकि विदेशी वॉर शिप्स में सेंसर और सर्विलांस डिवाइसेस मौजूद थीं। जो अरिहंत के फीचर्स को ट्रेस कर सकती थीं। नेवी इसके हर फीचर को बिल्कुल सीक्रेट रखना चाहती है।

आपको बता दें कि भारत सरकार ने साल 1970 में आईएनएस अरिहंत के प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी। 1984 में इसके लिए डिजाइन और टेकनोलॉजी को फाइनल किया गया था। 1998 में प्राइवेट सेक्टर की मदद से इसे बनाने का काम शुरू किया गया था। 2009 में अरहिंत को पहली बार पानी में उतारा गया था। हालांकि 2013 में इस पर लगे रिएक्टर में कुछ दिक्कतें आ गई, जिसके बाद इसके कई टेस्ट किए गए थे। 2016 में लगातार इसके परीक्षण किए गए और अब यह नौसेना में शामिल के लिए पूरी तरह तैयार है।

भारत आईएएनएस अरिहंत जैसी 6 परमाणु पनडुब्‍बी बनाना चाहता है, जिन पर 90,000 करोड़ रुपए का खर्च आने का अनुमान है। आईएनएस अरिहंत के सफल परीक्षण के बाद भारत अब पानी के अंदर, जमीन और हवा से परमाणु हमले करने में सक्षम हो गया है। चीन और पाकिस्तान दोनों भारत को समंदर में घेरने की लगातार कोशिश कर रहे हैं। लेकिन आईएनएस अरिहंत के आने से उन्हें करार झटका लगा है।

दुनिया में और किन बड़े देशों के पास न्यूक्लियर सबमरीन:

अमेरिका: अमेरिका की बात करें तो यूएस नेवी की सबमरीन्स को दुनिया की सबसे खतरनाक वॉटर मशीन कहा जाता है। अमेरिका की सबसे खतरनाक सबमरीन सी वोल्फ है। यह न्यूक्लियर हथियारों से लैस है। ये 1700 किमी की दूरी तक टारगेट हिट कर सकती है। बताया जाता है कि फर्स्ट वर्ल्ड वॉर से ही अमेरिका ने पनडुब्बी का इस्तेमाल शुरू कर दिया था। आज अमेरिका के पास सबसे अधिक सबमरीन मौजूद हैं।

रूस: रूस के पास ग्रेनी और सिएरा जैसी कई सबमरीन हैं, जो न्यूक्लियर हथियारों से लैस हैं। सबमरीन से क्रूज मिसाइल लॉन्च करने की खास तकनीक भी रूस के पास है।

ब्रिटेन: ब्रिटेन के पास भी न्यूक्लियर सबमरीन्स हैं। 2010 में ब्रिटेन ने एसटू क्लास नाम से न्यूक्लियर सबमरीन लॉन्च की थी। इस सबमरीन में 1700 किमी तक पानी के भीतर और जमीन पर हमला करने की क्षमता है।  

चीन: 1978 में चीन ने न्यूक्लियर सबमरीन बनाना शुरू किया। इसके बाद 1981 में चीन की पहली न्यूक्लियर सबमरीन लॉन्च हुई। चीन के पास टैंग क्लास, जिन क्लास और जिया क्लास की सबमरीन हैं। कहा जाता है कि चीन अपनी 20 परमाणु सबमरीन हमेशा तैनात रखता है।

फ्रांस: फ्रांस के पास बैराकुडा क्लास की न्यूक्लियर सबमरीन है। इससे पहले उनके पास रुबिस क्लास की सबमरीन्स थीं। इन्हें रिप्लेस कर बैराकुडा क्लास सबमरीन शामिल की गई। यह 1000 किमी तक हमला करने में सक्षम है।