रूस के साथ मिलकर भारत बनाएगा 'हिट मैन', अब समंदर में बनेगी चीन-पाकिस्तान की समाधि



न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (22 नवंबर): हिंदुस्तान की सीमा पर एक तरफ चीन है तो दूसरी तरफ पाकिस्तान। दोनों ही सरहद पर हिंदुस्तान के खिलाफ कोई ना कोई साजिश रचते रहते हैं। चीन आंख दिखाता है, समंदर में दादागीरी दिखाता है। कुछ समय पहले तो चीन ने भारत की समुद्री सीमा में पनडुब्बी तक भेज दी थी। वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान आतंकियों की घुसपैठ कराता है, लेकिन अब दुश्मनों को करारा जवाब देने के लिए हिंदुस्तान आ रहा है हिट मैन। ये हिट मैन हिंदुस्तान के दुश्मनों की समंदर में ही समाधि बना देगा। जल थल और आकाश कहीं भी दुश्मन छिपा हो उसका सर्वनाश कर देगा।

भारतीय नौसेना के बिना समंदर में कदम रखा तो समंदर में ही मार गिराएगा हिटमैन। आसमान में पंख फैलाया तो सर्वनाश कर देगी मिसाइल। पानी के नीचे घुसे तो खत्म कर देगा एंटी सबमरीन रॉकेट। एक ऐसा युद्धपोत समंदर में दस दुश्मनों पर भारी पड़ने वाला है। हिंद महासागर में भारत की पहरेदारी के लिए नौसेना का सबसे आधुनिक डिस्ट्रॉयर जल्द तैनात होने वाला है। भारत और रूस के बीच रक्षा क्षेत्र में सबसे बड़ी डील हुई है, जिसके तहत रूस की मदद से भारतीय सेना के लिए गोवा में दो मिसाइल युद्धपोत का निर्माण करेगा। एक दिन पहले ही दोनों देशों ने टेक्नोलॉजी ट्रांसफर मॉडल के तहत 50 करोड़ डॉलर यानी 3570 करोड़ रुपये की इस पर हस्ताक्षर किए गए।

यानी भारत रूस की मदद से समंदर का सिकंदर बनने वाला है। भारतीय नौसेना के बेड़े में जल्द तलवार क्लास के दो जंगी जहाज शामिल होने वाले हैं, जो पूरी तरह से आधुनिक हथियारों से लैस होंगे। ये दोनों युद्धपोत स्टील्थ टेक्नोलॉजी से लैस होंगे। ऐसे में इन्हें सोनार और रडार भी ट्रेस नहीं कर पाएंगे। स्टील्थ टेक्नोलॉजी की वजह से ही ये जंगी जहाज दुश्मन के इलाके में अपने मिशन आसानी से पूरे कर सकेंगे। दोनों जंगी जहाजों को आधुनिक मिसाइल समेत दूसरे खौफनाक हथियारों से भी लैस किया जाएगा।

इसके बाद जल थल और आकाश कहीं भी दुश्मन ने हिंदुस्तान को आंख दिखाने की कोशिश की तो हिंदुस्तान के ये हिटमैन उसकी आंखें ही निकाल देंगे। इस डील में रूस जीएसएल को डिजायन, टेक्नोलॉजी समेत दूसरी सामग्री भी देगा, जिससे भारत में ऐसे जंगी जहाजों का आसानी से निर्माण हो सकेगा। भारत और रूस के बीच हुई इस सबसे बड़ी डील से भारत की समंदरी सुरक्षा भी वाटरप्रुफ हो जाएगी। 125 मीटर लंबे ये तलवार क्लास का युद्धपोत समंदर में तीस दिनों तक गश्त लगा सकता है। चार हजार टन से ज्यादा का ये वजनी ब्रिगेड बिना रीफ्यूलिंग के 9 हजार किलोमीटर का चक्कर लगा सकता है। नवेल गन और मिसाइलों से लैस इस जंगी जहाज को समंदर में चलती फिरती मौत की मशीन कहा जाता है। दुश्मनों का मुकाबला करने के लिए इसमें इलेक्ट्रॉनिक वॉर फियर सिस्टम लगाया जाएगा।

समंदर के नीचे पनडुब्बियों का शिकार करने लिए ये युद्धपोत टोरपीडो और एंटी सबमरीन रॉकेट से लैस होगा। इस जंगी जहाज में स्टील्थ लगा होगा जिससे ये रडार को भी धोखा देने में माहिर होगा। इसके अलावा इस तलवार क्लास जंगी जहाज में एक कमोव और के ए 31अवॉक्स हेलिकॉप्टर रखने की जगह भी है। 400 किलोमीटर दूर तक कमोव और के ए 31अवॉक्स हेलिकॉप्टर दुश्मनों के जंगी जहाजों का पता लगा सकता है।

चार हजार टन का ये युद्धपोत समंदर में नीचे और हवा में मौजूद दुश्मनों को बरबाद करने के लिए सुपरसोनिक मिसाइल से लैस होगा। ये विध्वंसक जहाज लंबी दूरी तक नजर रखने वाले रडार..सेंसर्स और सोनार के अलावा अचूक हथियारों से लैस होंगे। आपको बता दें कि रूस के साथ हुए समझौते के तहत ये दोनों तलवार क्लास जहाजों का निर्माण 2020 में शुरू होगा। पहला जंगी जहाज सेना में शामिल होने के लिए 2026 में तैयार होगा जबकि दूसरा एक साल बाद 2027 में नेवी के समुद्री बेड़े में शामिल हो सकता है।