अब रूस के साथ मिलकर भारत सुलझाएगा डोकलाम विवाद


नई दिल्ली (21 अगस्त): दो महीनों से भी ज्यादा समय से चले आ रहे डोकलाम विवाद को अब भारत अपने पुराने दोस्त रूस के साथ सुलझाएगा। सूत्रों का कहना है कि भारत पिछले 6 महीने के दौरान मॉस्को से इस बात के लिए संपर्क में है कि वह चीन को भारत विरोधी रवैया छोड़ने के लिए मनाए।

ब्रिक्स सम्मेलन को लेकर हुईं हालिया तैयारी बैठकों के दौरान भारतीय अधिकारियों ने रूसी समकक्षों के साथ डोकलाम के बारे में चर्चा की है। रूस को यह बताने की कोशिश की गई है कि डोकलाम में सड़क बनाकर चीन यथास्थिति को तोड़ रहा है और भारत की सुरक्षा के लिए यह खतरनाक है।

भारत को ऐसी उम्मीद भी नहीं है कि रूस डोकलाम मुद्दे पर खुलकर उसका समर्थन करे। भारत चाहता है कि रूस कूटनीतिक रास्तों से चीन को विवादित जमीन पर रोड बनाने से रोकने की कोशिश करे। नई दिल्ली भारतीय हितों खासकर आतंकवाद जैसे मुद्दों पर रूस का समर्थन चाहता है।

2016 के बीआरसी शिखर सम्मेलन के बाद जारी गोवा घोषणापत्र में भारत के हितों की अनदेखी हुई थी। यह घोषणापत्र राज्य प्रायोजित या सीमा पार आतंकवाद से संबंधित भारत की मुख्य चिंताओं को दूर करने में असफल रहा। ऐसा माना गया कि चीन ने भारत में आतंक फैला रहे आतंकी संगठनों के इस्लामाबाद के समर्थन होने की बात को इसमें शामिल करने से रोक दिया।

यही नहीं चीन ने पाकिस्थान स्थित आतंकी समूहों जैसे लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के मसले पर भी इस सम्मेलन में झटका दिया। हालांकि चीन ने रूस को सीरिया के आतंकी संगठन जबहत-अल-नुसरा का नाम दर्ज कराने से नहीं रोका।