'ब्रह्मोस' मिसाइल को दूसरे देशों को एक्सपोर्ट करने के लिए भारत-रूस सहमत

नई दिल्ली (27 मई): भारत और रूस 'सैद्धांतिक तौर' पर दुनिया की सबसे तेज एंटी शिप क्रूज़ मिसाइल ब्रह्मोस का निर्यात दूसरे देशों को करने के लिए तैयार हो गए हैं। इन देशों में यूएई, वियतनाम, दक्षिण अफ्रीका और चिली शामिल हैं।

'द फाइनैंशियल एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार के सूत्रों की तरफ से गुरुवार को इसकी जानकारी दी गई। रक्षा निर्यात नीति में कई बुनियादी बदलाव किए गए हैं। जिसमें यह परिणाम निकलकर आए हैं। "जहां तक ब्रह्मोस मिसाइल का सवाल है, यूएई, चिली, दक्षिण अफ्रीका और वियतनाम जैसे देशों से बातचीत अग्रिम स्थिति में चल रही हैं।"

बताया गया, "रूस ब्रह्मोस ज्वाइंट वेंचर में पार्टनर देश है। इसलिए सहमति के लिए बातचीत कई अन्य देशों से चल रही है। जिनमें फिलिपीन्स, दक्षिण कोरिया, अल्जीरिया, ग्रीस, मलेशिया, थाईलैंड, मिस्त्र, सिंगापुर, वेनेजुएला और बुल्गारिया के साथ इसे अगले स्तर पर ले जाया गया है।"

रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर जल्द ही वियतनाम जाने वाले हैं। जहां आसियान सदस्य देशों के साथ डील के लिए बातचीत की जाएगी। ऐसा उम्मीद है कि इस साल के अंत तक ब्रह्मोस एयरोस्पेस यूएई के साथ डील पर हस्ताक्षर करेगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि भारत और रूस दोनों के ही इस देश के साथ 'अच्छे' रिश्ते है। साथ ही वहां हितों के लिए संघर्ष भी चालू है। इसलिए वहां के लिए मिसाइल एक्सपोर्ट करने में कोई समस्या नहीं होगी।

वियतनाम के मामले में चीन ने अपनी चिंता का भारत के हथियार उपलब्ध कराने को लेकर पहले ही इज़हार किया है। दक्षिण चीन सागर और वियतनाम समुद्री सीमाओं को लेकर संघर्षरत हैं।

भारत-रूस ज्वाइंट वेंचर जल्द ही क्रूज़ मिसाइल्स को रूस के Su-30 फ्लैंकर C मल्टी रोल फाइटर एयरक्राफ्ट का परीक्षण कर रहे होंगे। जिसके लिए ग्राउंड टेस्ट्स पहले ही कर लिए गए हैं। 

ब्रह्मोस एक शॉर्ट रेंज रैमजेट सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल है। जिसे पनडुब्बियों, जहाजों, एयरक्राफ्ट्स और जमीन से भी लॉन्च किया जा सकता है। यह रूस के NPO Mashinostroeyenia और भारत के डिफेंस रीसर्च एंड डेवलेपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (डीआरडीओ) का ज्वाइंट वेंचर है। इन्होंने मिसाइल बनाने के लिए ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना की है। ब्रह्मोस का नाम दोनों देशों की दो नदियों के नामों के आधार पर रखा गया है। इसमें भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मोस्कवा।