UN में फिर कश्मीर का रोना रोया पाकिस्तान, जवाब में भारत ने जमकर धोया

नई दिल्ली(9 मार्च): अंतरराष्ट्रीय मंच पर कश्मीर का मुद्दा उठाने पर भारत ने पाकिस्तान को एक बार फिर घेरा है। दरअसल संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के 37वें सत्र में पाकिस्तान ने कश्मीर में कथित मानवाधिकारों के उल्लंघन का मामला उठाया था। इस पर जवाब देने के अपने अधिकार का इस्तेमाल करते हुए भारत ने गुरुवार को कड़ी प्रतिक्रिया दी। 

- भारत ने कहा कि पाकिस्तान की यह आदत बन चुकी है कि वह भारत के आंतरिक मामलों में दखल देते हुए जम्मू और कश्मीर प्रांत को लेकर परिषद को गुमराह करने की कोशिश करता है।

- भारतीय प्रतिनिधि ने पाकिस्तान के इस रवैये पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। पाकिस्तान के कथित मानवाधिकारों से जुड़े आरोपों पर भारत ने कहा, 'परिषद को यह मालूम होना चाहिए कि यह मानवाधिकारों को लेकर झूठी चिंता उस देश की ओर से जताई जा रही है जिसने बलूचिस्तान, सिंध, खैबर पख्तूनख्वा और पाक अधिकृत कश्मीर के लोगों पर जुल्म किए हैं। पाकिस्तान लंबे समय से मानवाधिकारों की बातकर अपनी क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं और आतंकवाद को अपनी स्टेट पॉलिसी के तौर पर इस्तेमाल को छिपाने की कोशिश करता रहा है।' 

- भारत ने कहा, 'आतंकवाद मानवाधिकारों का सबसे बड़ा उल्लंघन है। भारत के प्रांत जम्मू और कश्मीर की असली समस्या आतंकवाद है, जिसे पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले इलाके से फैलाया जा रहा है।' भारत ने UNHRC के अध्यक्ष से अनुरोध किया कि परिषद पाकिस्तान से सीमा पार से जारी घुसपैठ, आतंकियों के ठिकानों को ध्वस्त करने, टेरर फंडिंग रोकने और पीओके के लोगों को आजादी देने के लिए अपना गैरकानूनी कब्जा छोड़ने को कहे। 

- इसके साथ ही भारत ने पाक में अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित किए जाने का भी मुद्दा उठाया। भारत ने कहा कि पाक में हिंदुओं, सिखों और ईसाइयों को ईशनिंदा कानून के झूठे आरोपों में फंसाया जाता है। अल्पसंख्यकों का धर्म परिवर्तन खासतौर से लड़कियों की जबरन शादी की घटनाएं नहीं रुक रही हैं।