भारत में 'सेकेंड हैंड' iPhones बेचने के प्रस्ताव को सरकार ने किया नामंजूर

नई दिल्ली (4 मई): भारत ने अमेरिकी स्मार्टफोन कंपनी एपल आईएनसी की एक योजना के प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया है। जिसमें कंपनी ने इस्तेमाल किए गए सेकेंड हैंड iPhones को आयात करने के लिए कहा था। भारत के ना कहने पर अमेरिकी कंपनी को एक झटका लगा है, क्योंकि वह अपने फ्लैगशिप स्मार्टफोन्स की बिक्री को नए तरह से शुरू करना चाहती थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, एपल डिस्काउंट के साथ कम कीमत पर कुछ देशों में अपने iPhones बेचता है। जिन्हें 'रीफर्बिश्ड iPhones' कहा जाता है। इन देशों में अमेरिका भी शामिल है। एपल इसी अभ्यास को भारत में भी लागू करना चाहता था। जिससे यह अपने प्रतियोगियों की तुलना में कम कीमत में ही अपने प्रोडक्ट्स ऑफर कर सके।

भारत एक तरफ 'मेक इन इंडिया' को बढ़ावा दे रहा है। जिससे यह अपनी मैनुफैक्चरिंग इंडस्ट्री में प्रतियोगिता को बढ़ावा दे सके। इसलिए भारत ने इस्तेमाल किए गए इलैक्ट्रॉनिक्स को आयात करने के प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया।

टेलीकॉम मंत्रालय के प्रवक्ता एनएन कौल ने कहा, "भारत जोखिमयुक्त सामानों की डंपिंग और रीसाइक्लिंग को बढ़ावा नहीं देता।" सिंगापुर में एपल के प्रवक्ता से इस बारे में उनकी टिप्पणी के लिए संपर्क किया गया। लेकिन उन्होंने ईमेल का जबाब नहीं दिया है। 

भारत में एक औसत स्मार्टफोन 150 डॉलर से कम कीमत में बिकता है। इसकी तुलना में नया लॉन्च हुआ iPhone SE करीब 39,000 रुपए (585 डॉलर) में बिकता है। यह कीमत अमेरिकी कीमतों के मुकाबले ज्यादा है। वहां इसकी कीमत 399 डॉलर के करीब है। भारत में इसकी आयात कर और वितरण की लागत के चलते कीमत ज्यादा है।

गौरतलब है, रीफर्बिश्ड  iPhones उन डिवाइसेस को कहा जाता है जो खरीददारों की तरफ से लौटा दी जाती हैं। या डैमेज के बाद में फैक्ट्री में रिपेयर की जाती हैं।

एपल के प्रस्ताव को घरेलू फोन निर्माताओं ने विरोध किया था। जिन्होंने दावा किया कि इस्तेमाल किए गए  iPhones की बिक्री भारत के एंटी-डंपिंग रूल्स के खिलाफ हैं। कन्ज्यूमर इलैक्ट्रॉनिक्स एंड एप्लियांसेस मैनुफैक्टर्स एसोसिएशन ने भारतीय टेलीकॉम मंत्रालय को इस कदम को रोकने के लिए कहा था।