भारत के इन पांच कदमों से दुनिया के नक्शे से गायब हो जाएगा पाकिस्तान!

नई दिल्ली (30 सितंबर): पीओके में भारतीय सेना के द्वारा सर्जिकल स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान यह भी नहीं सोच पा रहा है कि उसे क्या करना चाहिए। भारतीय सैनिकों ने आखिरकार उरी हमले में मारे गए अपने 19 जवानों की मौत का बदला ले लिया है।

हालांकि अभी भी पाकिस्तान भारत को हेकड़ी दिखाने में लगा है, लेकिन अगर भारत यह कदम उठा लेता है तो आतंकवाद के साथ-साथ पाकिस्तान भी दुनिया के नक्शे से गायब हो जाएगा।

खुफिया एजेंसियों के मुताबिक लश्कर-ए-तोएबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिज्‍बुल मुजाहिदीन जैसे खतरनाक आतंकवादी संगठनों के आतंकी पीओके में पाले जाते हैं। पाकिस्तान की आईएसआई और सेना मौके का फायदा उठाकर इन आतंकियों को हिंदुस्तानी सीमा में भेजती है। अगर भारत देश के अंदर से या फिर मिलिट्री ऑपरेशन से इन आतंकी कैंपों को खत्म कर देता है। तो आतंकियों के हौंसले पस्त हो जाएंगे। देश के अंदर भी कई बार ये मांग उठ चुकी है। रक्षा मामलों के जानकार भी ये मानते हैं कि भारत ऐसी कार्रवाई कर सकता है।

पाकिस्तान ने हिंदुस्तान को हमेशा धोखा ही दिया है उरी जैसे हमले इस बात की ओर इशारा करते हैं कि पाकिस्तान जैसी भाषा बोलता है उसे वैसी ही भाषा में जवाब अगर मिले तो कश्मीर का मसला हल हो सकता है। जैसे को तैसा की नीति से पाक को सबक मिलेगा। और वहीं पूरी दुनिया में एक संदेश भी जाएगा।

कश्मीर में जिहाद की जड़ पाकिस्तान में है। अमेरिका और रुस के बीच शीत युद्ध से दुनिया ने सबक लिया कि दुश्मन देशों की आंतरिक गतिविधियों को बाहरी शक्तियों से कंट्रोल किया जा सकता है। इसी पश्चिमी नीति का नतीजा ये हुआ कि परमाणु शक्ति संपन्न् सोवियत संघ टूट गया। वैसे ही आतंरिक हालात पाकिस्तान में है। पाकिस्तान खंड-खंड होने की कगार पर है। पाकिस्तान, बलूचिस्तान और पीओके के बाद सिंध ने भी पाक से आजादी की मांग कर रहा है। ऐसे में भारत को भी चाहिए कि वो पाकिस्तान में बगावत को और चिंगारी दे और पाकिस्तान को आंतरिक मामलों में उलझाए रखे।

अमेरिका भी ये मानता है कि मोदी पहले जैसे प्रधानमंत्रियों से नहीं हैं। भारत में अमेरिका के रजदूत रहे राबर्ट ब्लैकविल का साफ मानना है कि मौजूदा राजनीतिक माहौल में मोदी सैन्य ताकत का इस्तेमाल कर सकते हैं।

अगर कोई बड़ा आतंकी हमला होता है और उसके तार पाकिस्तान की सरजमीं, पाकिस्तानी सेना और आईएसआई से जुड़ते हैं तो मोदी सैन्य ताकत का इस्तेमाल करने से नहीं हिचकेंगे। मोदी का व्यक्तित्व, भारत के लोगों की भावना पर ध्यान देने का उनका तरीका और देश में मौजूद राजनीतिक माहौल के चलते वे अपने पूर्वाधिकारी (मनमोहन सिंह) के विपरीत जाकर सैन्य ताकत का इस्तेमाल जरूर करेंगे।

साफ है कि पाकिस्तान के नापाक हरकते और आतंकियों को अपनी सरजमी पर पनाह और समर्थन खुद पाकिस्तान के लिए खतरा बनता जा रहा है। वो समय नजदीक आता जा रहा है जब पाकिस्तान को इसका अंजाम भुगतना ही होगा।