बिना एक गोली चलाए इस तरह से पाक को भिखारी बनाएगा भारत

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न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (18 फरवरी):
पुलवामा हमले के बाद देशभर में मांग उठ रही है कि पाकिस्तान को बर्बाद कर दिया जाए। लोग मोदी सरकार से कह रहे हैं कि बार-बार की झंझट को एक बार युद्ध करके खत्म कर दिया जाना चाहिए। हालांकि पाकिस्तान को खत्म करने के लिए भारत को युद्ध करने की कोई जरूरत भी नहीं है, क्योंकि हमारे देश के पास कुछ ऐसे हथियार है जिनसे कंगाल पाकिस्तान को भिखारी बनने में ज्यादा समय नहीं लगेगा।

जी हां, हिंदुस्तान के पास सिर्फ एटम बम ही नहीं एक ऐसा वाटर बम भी है, जिससे पाकिस्तान तबाह हो सकता है। इस वाटर बम से उतनी ही तबाही होगी जितनी, एटम बम से होती है और हिंदुस्तान का ये वाटर बम है सिंधु जल समझौता। ये वो समझौता है जिसकी वजह से पाकिस्तान को पानी मिलता है और उस पानी से वहां पैदा होता है अनाज। पुलवामा अटैक के बाद भारत सरकार सिंधु जल समझौता तोड़कर पाकिस्तान को उसके भयंकर अंजाम तक पहुंचा सकती है। भारत अगर ये समझौता तोड़ दे तो पाकिस्तान महीने दो महीने में प्यासा मर जाएगा और पुलवामा अटैक के बाद ये मांग पूरे हिंदुस्तान में हो रही है। जानकारों की राय में युद्ध की बजाय भारत के पास सिंधु जल समझौता एक ऐसा हथियार है, जिसे चला कर एक झटके में पाकिस्तान को घुटने पर लाया जा सकता है।

क्या है सिंधु जल समझौता...

- 1960 में रावलपिंडी मे भारत के प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल अयूब खान के बीच सिंधु जल समझौता हुआ था।

- भारत और पाकिस्तान के बीच सतलुज, व्यास, रावी, सिंधु, झेलम और चेनाब नदियों के पानी के बंटवारे की व्यवस्था की गई है।

- संधि के तहत सतलज, व्यास और रावी का अधिकतर पानी भारत के हिस्से में रखा गया।

- जबकि सिंधु, झेलम और चेनाब का ज्यादातर पानी पाकिस्तान को देने पर सहमति बनी।

- इस समझौते के तहत इन नदियों का 75 फीसदी पानी पाकिस्तान को और 25 फीसदी पानी भारत को मिलता है।

- यानि इस उदार समझौते से पूरी तरह पाकिस्तान को ही फायदा होता है, लेकिन इस भारत की उदारता का पाकिस्तान ने हमेशा फायदा उठाया है। वो हिंदुस्तान का पानी पीकर हिंदुस्तान के जवानों का लहू बहा रहा है।

सिंधू और बाकी पांच नदियों से पाकिस्तान को कैसे फायदा पहुंच रहा है...

- सिंधु नदी तिब्बत से होते हुए कश्मीर तक आती है और फिर गिल्गिट बाल्टिस्तान के रास्ते पाकिस्तान तक जाती है। सिंधु दुनिया की 21 सबसे बड़ी नदियों में से एक है। सिंधु को Indus भी कहा जाता है, जिसके नाम पर हमारे देश का नाम India पड़ा। 5500 से 8000 साल पुरानी सिंधु घाटी सभ्यता भी इसी सिंधु नदी के किनारे विकसित हुई थी। आज भी करीब 30 करोड़ की आबादी सिंधु नदी के किनारे बसती है।

- सिंधु जल संधि के तहत दूसरी नदी आती है झेलम: झेलम नदी कश्मीर से निकलती है और पीओके होते हुए पाकिस्तान में जाती है। झेलम नदी पर हिंदुस्तान का किशनगंगा प्रोजेक्ट चल रहा है।

- तीसरी नदी है चेनाब: चेनाब नदी हिमाचल और जम्मू-कश्मीर के बॉर्डर पर ज़ांस्कार से निकलती है, जो पीओके के रास्ते पाकिस्तान में जाती है।

- इंडस वॉटर ट्रीटी में चौथी नदी है रावी: रावी नदी हिमाचल से निकलते हुए पंजाब जाती है और वहां से पाकिस्तान में प्रवेश करती है।

- ब्यास नदी: ब्यास नदी भी हिमाचल से निकलते हुए पंजाब जाती है और वहां से पाकिस्तान जाती है।

- सिंधु जल संधि में आखिरी नदी सतलुज है। सतलुज तिब्बत से होते हुए पंजाब आती है और वहां से पाकिस्तान में प्रवेश करती है। हिंदुस्तान का मशहूर भाखड़ा–नागल बांध सतलज नदी पर ही बना है।

सिंधु जल समझौता भारत के हाथों में एक ऐसा हथियार है जिसे तोड़कर भारत पाकिस्तान से पुलवामा का बदला ले सकता है। अगर भारत ने ये समझौता तोड़ दिया तो पाकिस्तान कैसे भूखा-प्यासा तिल-तिल कर मरेगा। दरअसल ये समझौता ही पाकिस्तान की लाइफ लाइन है और जब से पुलवामा अटैक हुआ तब से पाकिस्तान को अपना नल बंद होते दिख रहा है। ऐसे में पाकिस्तान की सरकार में तो हड़कंप मचा ही है, पाकिस्तान का मीडिया भी चीत्कार रहा है। सिंधु जल समौझात सिर्फ एक समझौता नहीं है। ये हिंदुस्तान के हाथ में वो वाटर बम है जो पाकिस्तान में वो तबाही मचा सकता है जो एटम बम से भी नहीं होगी।

पाक को क्या होता है फायदा...

- 6 नदियों की वजह से पाकिस्तान का उत्तरी और पश्चिमी भाग हरा भरा है

- इन नदियों ने इस्लामाबाद से कराची तक की 65 फीसदी ज़मीन को उपजाऊ बना रखा है

- इन्हीं नदियों के किनारे पाकिस्तान का 70% अनाज उगता है

- पाकिस्तान की 2.6 करोड़ एकड़ ज़मीन सिंचाई के लिए इन्ही नदियों पर निर्भर है

- इन्ही नदियों पर बने बांधों से पाकिस्तान की 36% बिजली का उत्पादन होता है

- पाकिस्तान की 20 करोड़ की आबादी में से 15 करोड़ लोग सिंधु नदी बेसिन में रहते हैं

- पाकिस्तान के दोनों बड़े न्यूक्लियर प्लांट चश्मा और खुशाब भी इन्हीं नदियों के किनारे पर लगे हैं