भारत-पाक में हुआ परमाणु युद्ध तो दोनों देशों के अलावा दुनिया पर पड़ेगा यह असर

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न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (23 फरवरी): 
कायर पाकिस्तान विध्वंस की राह पर आगे बढ़ता दिख रहा है। हिंदुस्तान जैसे-जैसे उसकी गर्दन पर अपना शिकंजा कसता जा रहा है, वैसे-वैसे वो जंग का अलाप छेड़ रहा है। बात-बात में पाकिस्तान के नेता परमाणु युद्ध की बात कर रहे हैं जबकि उसे इस बात का बखूबी अंदाजा है कि इससे पहले कि वो एटम बम का बटन दबाएगा, उससे पहले ही उसका संपूर्ण विनाश हो जाएगा।

एटम बम के फटने पर एक झटके में 2 करोड़ 10 लाख लोगों की मौत हो जाएगी। पूरी दुनिया की आधी ओज़ोन परत पूरी तरह से तबाह हो जाएगी।


दुनिया पर पड़ेगा यह असर...

पूरे विश्व में 2 अरब लोगों पर इसका सीधा असर पड़ेगा। धरती पर काला अंधेरा छा जाएगा, दुनिया में खेती तबाह हो जाएगी। न्यूक्लियर विंटर में सूरज की रौशनी कई दिनों तक धरती पर नहीं पहुंचेगी। जब एक एटम बम फटता है तो 25 मील तक सिर्फ और सिर्फ आग फैल जाती है। 50 मील तक इंसान और जानवर के कोई निशान नहीं बचते। एटम बम से इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगे पूरे कम्युनिकेशन सिस्टम को ध्वस्त कर देती है। मोबाइल और लैपटॉप में ब्लास्ट हो जाता है। करीब 1 हज़ार किलोग्राम के एटम बम के फटने पर करीब 10 करोड़ डिग्री तक की ऊर्जा पैदा होती है यानी 1 हज़ार किलोग्राम का एटम बम से इतनी ऊर्जा पैदा होती है, जितनी कई अरब किलो के परम्परागत बमों से भी पैदा नहीं होती।

सवाल उठता है कि आख़िर कैसे छोड़ा जाता है एटम बम ?
रूस और अमेरिका की तरह भारत के पास भी न्यूक्लियर ब्रीफकेस है। पुतिन और ओबामा की तरह ये न्यूक्लियर ब्रीफकेस हमेशा भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ चलती है। न्यूक्लियर ब्रीफकेस की खास बात ये है कि इससे दुनिया के किसी भी हिस्से में न्यूक्लियर अटैक किया जा सकता है।

क्या है न्यूक्लियर ब्रीफकेस ?
- अमेरिका में इसे न्यूक्लियर फुटबॉल कहते हैं
- रूस में इसे चैगेट कहा जाता है
- इस ब्रीफकेस का वजन करीब 20 किलो होता है
- इसमें एक छोटा एंटीना और परमाणु हथियारों के ट्रिगर होते हैं
- ट्रिगर को एक खास कोड के जरिए सक्रिय किया जाता है

इस न्यूक्लियर ब्रीफकेस का कोड सिर्फ उसे पता होता है जिसके पास ये न्यूक्लियर ब्रीफकेस होती है। किसी भी राष्ट्र के प्रमुख के बदलते ही इस न्यूक्लियर ब्रीफकेस का कोड भी बदल दिया जाता है। अगर किसी देश ने एटम बम छोड़ने का फैसला किया है तो उसे कम से कम 15 दिन तो एटम बम से जुड़ी सामग्री जुटाने में ही लग जाएंगे, क्योंकि एटम बम में लगने वाले साज़ो-सामान कभी एक साथ नहीं रखे जाते।

दुनिया में दक्षिण अफ्रीका इकलौता ऐसा देश है, जिसने खुद पहल करते हुए अपने परमाणु बम से जुड़े संयंत्रों को नष्ट किया है। बहुत कम लोग जानते होंगे कि साल 2001 में आतंकवादियों ने रूस में एटम बम चुराने की 2 बार कोशिश की थी और दोनों बार वो नाकाम रहे थे। इसलिए एटम बम को आतंकियों से बचाए रखना भी दुनिया के लिए बड़ी चुनौती है। हिंदुस्तान ने एटम बम की वो महारथ हासिल कर ली है, जिससे हिंदुस्तान के दुश्मन कांपते हैं। पाकिस्तान तो भारत के सामने कहीं टिकता भी नहीं। जिस मुल्क के पास अपने ही देश में जनगणना के लिए भी पैसे न हों, वो आखिर हिंदुस्तान का मुकाबला किस मुंह से करेगा।

दुनिया में 9 देशों के पास परमाणु हथियार हैं और इन सभी देशों में परमाणु हमले के लिए एक व्यवस्था बनाई गई है। हर मुल्क में इस व्यवस्था को कोई एक शख्स लीड करता है। आमतौर पर ये शख्स उस देश का संवैधानिक मुखिया होता है। परमाणु हमले के इसी अधिकार को आम बोल चाल की भाषा में परमाणु बटन कहा जाता है। परमाणु बटन भले किसी एक शख्स के पास ना हो, लेकिन पाकिस्तान जैसे देश में ये तय करना बेहद मुश्किल है कि आखिर एटम वॉर शुरू करने का किसका फैसला आखिरी होगा। इसकी वजह ये है कि पाकिस्तान में जितनी ताकत संवैधानिक सरकार के पास है, यहां की सेना का भी सरकार के फैसलों में उतनी ही दखल होता है। ऐसे में चुनी हुई सरकारों की कई बार तख्ता पलट कर चुकी पाकिस्तानी सेना घबराहट में ऐसा जरुर कर सकती है। हालांकि इतना तो तय है कि अगर ऐसा होता है तो सबसे ज्यादा नुकसान पाकिस्तान का ही होगा।