म्यांमार-बांग्लादेश आना-जाना हुआ आसान, भारत ने खोले दो बॉर्डर क्रॉसिंग पॉइंट

 नई दिल्ली(1 अक्टूबर): भारत अपने पड़ोसियों से रिश्ते पहले से बेहतर कर रहा है। इसका सबूत देते हुए म्यांमार और बांग्लादेश के बॉर्डर पर दो इंमीग्रेशन चेक पोस्ट खोल दिए गए हैं। इसके लिए गृह मंत्रालय की ओर से नोटिफिकेशन जारी किए गए हैं।

- पहली नोटिफिकेशन में लिखा है कि केंद्र सरकार मिजोरम के लॉन्गतलाई जिले में जोरिनपुई चेक पोस्ट को भारत में आने -जाने के लिए खोल रहे हैं। इसकी मदद से जिसके पास भी पहचान के पुख्ता सबूत और यात्रा करने के कागजात हैं वह म्यांमार में जा और वहां से भारत में आ सकता है।

- इसी तरह एक और नोटिफिकेशन जारी हुई है। मंत्रालय ने बताया है कि केंद्र सरकार ने मिजोरम के लुंगलेई जिले में क्वारपिकहुआ चेक पोस्ट को इमीग्रेशन के लिए खोलने का फैसला कर दिया है। इसकी मदद से कोई भी शख्स जिसके पास आने-जाने वाले ठीक कागजात होंगे उसको बांग्लादेश से आने और जाने दिया जाएगा।

- जोरिनपुई इलाका म्यांमार के सिट्वी पोर्ट से 287 किलोमीटर दूर है। जोरिनपुई पर जो नोटिफिकेशन आया है वह पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के 2012 के म्यांमार दौरे की वजह से है। तब दोनों देशों के बीच एग्रीमेंट साइन हुआ था।

- भारत के दोनों ही देशों से मधुर संबंध हैं। म्यांमार के साथ भारत 1,643 किलोमीटर का बॉर्डर शेयर करता है। यह अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर और मिजोरम को छूता है। बांग्लादेश के साथ भारत की सीमा 4,096 किलोमीटर तक फैली है। यह असम, त्रिपुरा, मिजोरम, मेघालय और पश्चिम बंगाल को छूती है।

- भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पांच सितंबर को दो दिन के लिए म्यांमार गए थे। यह दौरा रोहिंग्या संकट के बीच हुआ था। म्यांमार से रोहिंग्या मुसलमान बड़े पैमाने पर पलायन कर रहे हैं। उनमें के कई बांग्लादेश के रास्ते भारत में आए। भारत उनको निकालने की बात कर रहा है। भारत का कहना है कि सुरक्षा एजेंसियों ने इनपुट दिया है कि रोहिंग्या मुसलमानों के पाकिस्तानी आतंकियों से कनेक्शन हैं। हालांकि, सरकार के इस फैसले का विरोध हो रहा है। भाजपा नेता वरुण गांधी तक सरकार के इस फैसले के विरोध में लेख लिख चुके हैं।