अजहर पर नहीं बदलेगा चीन का रुख

 पणजी(15 अक्टूबर): शनिवार से दो दिन की ब्रिक्स समिट शुरू होने वाली है। इसके पहले चीन ने कहा है कि भारत की एनएसजी (न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप) और मसूद अजहर के मु्द्दे पर उसका स्टैंड पहले की तरह रहेगा।

-  बता दें कि चीन, भारत की एनएसजी मेंबरशिप को लेकर लगातार विरोध कर रहा है। वहीं, उसने यूएन में जैश-ए-मोहम्मद चीफ मसूद अजहर को आतंकी घोषित करने का विरोध किया था।

- चीन के विदेश विभाग के स्पोक्सपर्सन गेंग शुआंग ने कहा, 'भारत और चीन साथ मिलकर बेहतर काम करेंगे। लेकिन कुछ डिस्प्यूट भी हैं। हम ये भी कहना चाहते हैं कि बीजिंग की भारत की एनएसजी मेंबरशिप और अजहर को लेकर पॉलिसी में कोई बदलाव नहीं होगा।'

- भारत की अजहर को बैन करने को लेकर लगाई अप्लीकेशन पर शुआंग ने कहा, 'मैं ये बताना चाहता हूं कि यूएन की कमेटी, चार्टर के तहत मु्द्दों पर विचार कर रही है।'

- 'सभी पार्टियों में लिस्टिंग को लेकर मतभेद हैं। इसी के चलते चीन ने मसूद पर बैन लगाने के मुद्दे को होल्ड कर रखा है।'

- शुआंग ने ये भी कहा, 'चीन, भारत के एनएसजी मेंबरशिप के मुद्दे पर भी अपना पहले का रुख बरकरार रखेगा।'

- चीन का कहना है कि वह भारत के राजनीतिक फायदे के लिए ऐसी किसी भी कोशिश का सपोर्ट नहीं कर सकता।

- ब्रिक्स समिट के दौरान मोदी एनएसजी में भारत की मेंबरशिप का सपोर्ट करने पर भी जिनपिंग से बात कर सकते हैं। 

- रूस भी उड़ी अटैक के बाद पाकिस्तान के साथ ज्वाइंट आर्मी ड्रिल कर चुका है। भारत ने इस पर भी नाराजगी जताई थी।

- भारत-पाक पार्टीशन के 69 सालों में रूस की पाकिस्तान के साथ यह पहली आर्मी ड्रिल थी।

- भारत चाहता है कि ब्रिक्स की बैठक में सभी पांचों मेंबर ब्राजील, रूस, इंडिया, चाइना, साउथ और अफ्रीका पाकिस्तान की ओर से हो रहे हमलों का विरोध करें।  - मोदी की यह भी कोशिश है कि इस बैठक के जरिए मंदी से जूझ रहे सभी मेंबर देशों का हौसला बढ़ाया जाए। चीन अपने रुख पर कायम - हालांकि, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एनएसजी में भारत की दावेदारी और मसूद अजहर पर बैन के मसले पर चीन के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। - इन रिपोर्ट्स में चीन की फॉरेन मिनिस्ट्री के हवाले से कहा गया है कि वह इन दोनों ही मसलों पर सहमति बनने तक भारत का विरोध जारी रखेंगे।