ये रहे टीम इंडिया के हार के सबसे बड़े कारण

मुंबई (1 अप्रैल): वर्ल्ड टी 20 के दूसरे सेमीफाइनल मुकाबले में वेस्टइंडीज ने भारत को सात विकेट से हरा दिया। इसके साथ ही भारत टूर्नामेंट से बाहर हो गया। वहीं जीत के साथ फाइनल में पहुंची वेस्टइंडीज का खिताबी मुकाबला इंग्लैंड से होगा। भारत-वेस्टइंडीज के बीच हुए सेमीफाइनल में भारत के कई वीक प्वाइंट रहे। आइए नजर डालते हैं उन कारणों पर जिससे भारत को हार मिली...

टॉस हारना टीम इंडिया की हार के पीछे कई कारण हैं। लेकिन उनमें सबसे बड़ा कारण टॉस का हारना भी रहा। क्योंकि वानखेडे स्टेडियम की पिच का रिकॉर्ड है कि अधिक्तर मुकाबलों में बाद में बैटिंग करने वाली टीम ही जीतती है। धोनी ने भी कहा कि इस मैदान पर टॉस हारना अच्छा नहीं था क्योंकि यहां पर ओस की अहम भूमिका रहती है। इसके बाद जब हमने गेंदबाजी शुरू की तो स्पिनरों के लिए ज्यादा कुछ करने को नहीं था।

नो बॉल पर गंवाए मौके वेस्टइंडीज के 83 रन की नाबाद पारी खेलने वाले सिमंस को मिला दो बार का जीवन दान भारत के लिए हार का सबसे बड़ा कारण रहा। वो दो बार आउट हुए लेकिन दोनों बार नो बॉल थी। गेंदबाजों की इस गलती का खामियाजा उनके 83 रनों की ताबड़तोड़ पारी के रूप में भुगतना पड़ा। सिमंस को 18 रन पर जीवनदान मिला। इस दौरान अश्विन की गेंद पर बुमराह ने शानदार कैच लिया लेकिन नो बॉल होने के कारण निराशा ही हाथ लगी। वहीं पारी के 15वें ओवर की अंतिम गेंद पर दूसरा जीवनदान मिला। इस बार हार्दिक पांड्या ने नो बॉल किया जिस पर अश्निन ने कैच पकड़ा था।

गेंदबाजों की नाकामी कोहली की ताबड़तोड़ पारी की मदद से भारत ने 193 रनों का टारगेट रखा। लेकिन गेंदबाजी लचर रही और भारत मैच गंवा बैठा। भारत की तरफ से बुमराह ने 4 ओवर में 42, जडेजा ने 4 ओवर में 48 और पांड्या ने 4 ओवर में 43 रन खर्च किए जबकि तीनों ने मिलकर मात्र एक विकेट निकाला।

ड्यू फेक्टर बल्लेबाजी के अनुकूल मानी जाने वाली वानखेड़े की पिच में ड्यू फेक्टर यानी ओस की अहम भूमिका रहती है। दूसरी पारी में ओस गिरने से गेंद गिली हो जाती है जिससे गेदबाजों को पिच से कोई खास मदद नहीं मिलती है और इसका तो इतिहास रहा है। यहीं कारण रहा कि वेस्टइंडीज के खिलाफ अश्विन और जडेजा काफी महंगे साबित हुए।