भारत ने लॉंच किया पहला स्वदेशी रियूज़ेबल अंतरिक्ष यान

नई दिल्ली (23 मई):  भारत ने अंतरिक्ष की दुनिया में नया इतिहास रचा है। इसरो ने पहली बार देश में बने दोबारा इस्तेमाल हो सकने लायक स्पेस शटल को लॉन्च कर दिया। यह पूरी तरह से 'मेड-इन-इंडिया' प्रयास है। रीयूज़ेबल लॉन्च वीइकल- टेक्नॉलजी डेमॉनस्ट्रेटर यानी आरएलवी टीडी को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से सुबह के सात बजे लॉन्च किया गया। लॉन्चिंग के 20 मिनट बाद मिशन को कामयाब करार दे दिया गया।

आरएलवी टीडी का मुख्य लक्ष्य पृथ्वी की कक्षा में सैटलाइट को पहुंचाना और फिर वायुमंडल में लौट आना है। इस शटल को एक ठोस रॉकेट मोटर से ले जाया गया। इस 6.5 मीटर लंबे रॉकेट का वजन 1.75 टन है। इसे 600 वैज्ञानिकों की टीम ने पांच सालों की मेहनत के बाद 95 करोड़ की लागत से तैयार किया है। राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने इसरो की इस कामयाबी के लिए अंतरिक्ष वैज्ञानिकों को बधाई दी है। बड़े देश फिर से इस्तेमाल किए जा सकने वाले प्रक्षेपण यान के विचार को खारिज कर चुके हैं।

इसके विपरीत भारत के इंजिनियरों का मानना है कि उपग्रहों को कक्षा में पहुंचाने की लागत को कम करने का उपाय यही है कि रॉकेट को दोबारा इस्तेमाल किए जाने लायक बनाया जाए। इसरो के वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि यह टेक्नॉलजी सफल होती है तो वे अंतरिक्ष में प्रक्षेपण की लागत को 10 गुना कम करके 2,000 डॉलर प्रति किलो पर ला सकते हैं। यह पहला मौका है, जब इसरो ने डेल्टा पंखों से लैस अंतरिक्ष यान को लॉन्च किया। वैज्ञानिकों का कहना है कि फाइनल आरएलवी 40 मीटर लंबा होगा और अंतरिक्षयात्रियों को ले जाने में सक्षम होगा।