भारत के इस प्रोजेक्ट पर अड़ंगा लगाना चाहता है पाकिस्तान

नई दिल्ली (3 अक्टूबर): पाकिस्तान को पता है कि वह युद्ध में भारत से कभी नहीं जीत सकता। इसलिए वह दूसरे तरह से देश को आर्थिक नुकसान करने में लगा है। पाकिस्तान ने वर्ल्ड बैंक के सामने किशनगंगा हाइड्रोपावर प्रॉजेक्ट पर सवाल उठाए हैं। उसने मांग की है कि वह उसकी आपत्तियों को सुनने के लिए इस मसले पर मध्यस्थता अदालत (कोर्ट ऑफ ऑर्बिट्रेशन) बिठाए।

भारत ने पाकिस्तान की आपत्तियों को दरकिनार करते हुए एक तटस्थ एक्सपर्ट से जांच कराने को कहा है। सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के इस प्रॉजेक्ट की डिजाइन पर सवाल उठाए हैं। पाकिस्तान का आरोप है कि इसकी डिजाइन सिंधु जल समझौते में तय किए मानकों से अलग है।

भारत ने किशनगंगा प्रॉजेक्ट पर पाकिस्तान की आपत्तियों को दरकिनार किया है। भारत का कहना है कि प्रॉजेक्ट की डिजाइन समझौते के 'मापदंडों के मुताबिक' ही है। साथ ही साथ भारत ने विश्व बैंक से कहा है कि वह इस मसले पर एक तटस्थ पर्यवेक्षक की नियुक्ति करे, क्योंकि यह एक 'तकनीकी मामला' है।

पाकिस्तान में किशनगंगा नदी को 'नीलम' के नाम से जाना जाता है। पाकिस्तान का आरोप था कि भारत के इस हाइड्रोपावर प्रॉजेक्ट की वजह से किशनगंगा के निचले हिस्से पर बने उसके नीलम-झेलम हाइड्रोपावर प्लांट की क्षमता पर भी असर पड़ेगा। हालांकि 2013 में इस मसले का फैसला भारत के पक्ष में ही सुनाया गया था।