लड़ाकू ड्रोन की जगह भारत को जासूसी ड्रोन देना चाहता है अमेरिका

नई दिल्ली (26 जून): भारत अपनी समुद्री सीमाओं पर नजर रखने के लिए अमेरिका से सर्विलांस और युद्धक ड्रोन खरीदना चाहता है। इसके लिए डील अंतिम चरण में पहुंच है। इन ड्रोन्स को भारतीय नौसेना में शामिल किया जाने वाला है। लेकिन मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका भारत को जासूसी करने में सक्षम ड्रोन की सप्लाई करना चाहता है। अब सवाल यह है कि इन दोनों ड्रोन्स में से भारत के लिए सबसे ज्यादा उपयोगी कौन हो सकता है।


फाइटर जेट्स के मुकाबले ड्रोन्स को सैटेलाइट के द्वारा हजारों किलोमीटर दूर से भी नियंत्रित किया जा सकता है। इतना ही इनसे मिसाइलें भी दागी जा सकती हैं। अमेरिका पहले से ही इन लड़ाकू ड्रोन का इस्तेमाल अफगानिस्तान में तालिबानी आतंकियों पर हमला करने के लिए कर रहा है।  


भारत ने अभी अमेरिका से MQ-9B मानव रहित हवाई वाहनों (UAVs) के लिए बातचीत की है। MQ-9B लंबी दूरी तक मार करने वाला लड़ाकू विमान है जिसमें 27 घंटे बिना रुके उड़ने की क्षमता है। लेकिन, इससे पहले भारत को 34 सदस्यीय मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण संगठन में शामिल होना पड़ेगा। जिसमें 300 कि.मी से उपर की रेंज के मानव रहित हवाई वाहनों और मिसाइलों में प्रसार करने पर रोक है।


वहीं, पीएम मोदी की वांशिगटन यात्रा से पहले ट्रंप प्रशासन ने भारत को 22 MQ-9B सरंक्षक ड्रोन बेचने की डील की थी। इन ड्रोनों की कीमत 2 बिलियन डॉलर से ज्यादा थी जिसमें ड्रोन संबंधित पुर्जे, उसके रखरखाव और प्रशिक्षण पैकेज शामिल हैं। भारत सरकार सूत्रों के मुताबिक, अभी तक इस समझौते को वास्तविक रूप दिया जाना बाकी है।