डॉलर की बढ़ती कीमतों के लिए भारत ने निकाली ये काट

                                                                                                                   Photo Source: ANIन्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (30 अक्टूबर): रुपये के मुकाबले डॉलर की बढ़ती कीमत का भारत ने काट निकाला है। भारत ने जापान के साथ 75 अरब डॉलर का द्विपक्षीय स्वैप समझौता किया है। जापान के इस समझौते से देश में विदेशी करेंसी और पूंजी बाजार में स्थिरता आने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री मोदी और शिंजो आबे की बीच 75 अरब डॉलर का यह समझौता दुनिया का सबसे बड़ा स्वैप समझौता है। इस समझौते से उत्साहित केंद्र सरकार का कहना कि वह देश से पूंजी को बाहर जाने से रोकने के लिए कई कदम उठा रही है और यह फैसला भारतीय बाजार में भरोसा बढ़ाने वाला कदम है।

गौरतलब है कि अमेरिका में प्रमुख ब्याज दरों में बढ़ोतरी से पूंजी पर बेहतर लाभ के लिए दुनिया भर के निवेशक भारतीय बाजार में लगाई अपनी पूंजी तेजी से निकाल रहे हैं और अमेरिकी बाजारों में निवेश बढ़ा रहे हैं. इससे भारतीय रुपए की मजबूती पर भी असर पड़ा है. रुपया में और गिरावट न हो, इसके लिए जापान के साथ स्वैप समझौते को हरी झंडी दी गई है.आपको बता दें कि जापान के अलावा भारत का इस वक्त 20 देशों के साथ करेंसी स्वैप अरेंजमेंट यानी CSA है। ये समझौता दो मित्र देशों के बीच होता है । इसके तहत दोनों देश अपने स्थानीय करेंसी में कारोबार करते हैं। गौरतलब है सामान्यतया अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कारोबार डॉलर या फिर यूरो में होता है। इन दोनों करेंसी की मजबूती और गिरावट का असर अन्य देशों के कारोबार पर पड़ता है। इससे बचने के लिए दो देश आपस में सीएसए जैसे समझौता करते हैं। इसके तहत दो देश पहले से तय करेंसी की दर पर ही आयात या निर्यात की रकम चुकाते हैं। इसके लिए किसी तीसरे देश के करेंसी, मसलन डॉलर या यूरो की मदद नहीं लेनी पड़ती है। इसके तहत विदेश मुद्रा के विनिमय के झंझट से भी छुटकारा मिल जाता है।फिलहाल भारत का अग्रणी तेल निर्यातक देशों में अंगोला, अल्जीरिया, नाइजीरिया, ईरान, इराक, ओमान, कतर, वेनेजुएला, सऊदी अरब और यमन जैसे देशों के साथ सीएसए है। वहीं जापान, रूस, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर. इंडोनेशिया, मलेशिया, मैक्सिको, दक्षिण अफ्रीका और थाइलैंड जैसे गैर तेल उत्पादक देशों के साथ भी भारत का ये समझौता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि तीसरे देश की करेंसी मसलन डॉलर या फिर यूरो का कारोबार में उपयोग नहीं होता। इससे इन दोनों प्रमुख मुद्राओं की घट-बढ़ का असर अन्य देशों के कारोबार पर नहीं पड़ेगा।