तिब्बत के पास चीन सीमा पर भारत ने बढ़ाई सेना

नई दिल्ली(31 मार्च): भारत ने पिछले 8 महीनों में अरुणाचल प्रदेश से सटे चीन सीमा पर सेना की मौजूदगी बढ़ाई है। सेना के एक बड़े हिस्से को रणनीतिक तौर पर संवेदनशील माने जाने वाले दिबांग, दाउ देलाइ और लोहित घाटी में तैनात किया गया है। इसके अलावा सेना ने बॉर्डर पर निगरानी भी बढ़ाई है, जिससे चीन की हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। 

- बताया जा रहा है कि ये कदम चीन के साथ हुए डोकलाम विवाद को ध्यान में रखकर लिया गया है। पिछले साल भारत और चीन की सेनाएं डोकलाम क्षेत्र को लेकर 72 दिनों तक आमने-सामने रही थीं।

- सेना के अधिकारियों के मुताबिक, अरुणाचल में सेना अपना निगरानी तंत्र विकसित करने में जुटी है, ताकि चीन पर नजर रखी जा सके। इलाके की टोह लेने के लिए यहां हेलिकॉप्टर भी भेजे जाते रहे हैं।

- अधिकारियों ने बताया कि सेनाएं दिबांग, दाउ देलाइ और लोहित घाटियों के खतरनाक इलाकों पर मौजूदगी बढ़ाना चाहती हैं। इनमें 17 हजार फीट ऊंची बर्फीली पहाड़ियां और घाटी की गहराई में स्थित नदियां भी शामिल हैं। चीन हमेशा ही इन इलाकों को लेकर भारत पर दबाव बनाता रहा है।

- अरुणाचल के किबिथु में तैनात सेना के एक अधिकारी ने बताया- “डोकलाम के बाद सेना ने इस क्षेत्र में अपनी गतिविधियां बढ़ाई है। हम किसी भी खतरे से निपटने के लिए पूरी तरहतैयार हैं।”

- “सेना अब अपनी लंबी दूरी की गश्तों (लॉन्ग रेंज पैट्रोल्स) को बढ़ाने पर ध्यान दे रही है। इसमें छोटी-छोटी टुकड़ियां 15 से 30 दिन के लिए गश्त पर भेजी जाती हैं।” अधिकारी ने बताया कि भारत ये कदम लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) की पवित्रता बनाए रखने के लिए उठाया है। बता दें कि भारत और चीन बॉर्डर 1962 के बाद से आज तक एक भी गोली नहीं चली है। 

-अधिकारी ने नाम ना बताने की शर्त पर कहा कि सेना ने भारत, चीन और म्यांमार ट्राई-जंक्शन जैसे अहम रणनीतिक इलाकों को ध्यान में रखते हुए वहां भी सेना तैनात की है।