वायु सेना प्रमुख का छलका दर्द, आज भी उड़ाना पड़ रहा 44 साल पुराना मिग-21

मनीष कुमार, न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली(20 अगस्त): क्या कोई 44 साल पुरानी कार चलाता है, जवाब है जी नहीं, लेकिन जरा सोचिये हमारे वायु सेना के पायलट्स कैसे 44 साल पुराने मिग 21 लड़ाकू विमान को उड़ाना पड़ता होगा। जिसपर वायुसेवा प्रमुख बी एस धनोआ का दर्द छलक उठा। वायु सेना प्रमुख ने तंज कसते हुये कहा कि जब लोग 44 साल पुरानी अपनी कार को ड्राइव करना छोड़ देते हैं लेकिन हमें आज भी 44 साल पुराना मिग 21 विमान उड़ाना पड़ रहा है।” आपको बता दें जब वायुसेवा प्रमुख ये बातें कह रहे थे तो रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह उनके पास ही बैठे उनकी बातें सुन रहे थे। मिग 21 विमान पिछले चार दशकों से भारतीय वायु सेना के बेड़े में शामिल है। दुनिया में शायद ही किसी देश का वायुसेना इतना पुराना लड़ाकू विमान उड़ाता होगा। पर इसे भारत की जरुरत कहें या मजबूरी पर इंडियन एयर फोर्स के पायलट्स को आज भी मिग 21 विमान उड़ाना पड़ रहा है। इसकी प्रमुख वजह है भारतीय वायु सेना के विमानों के खरीद में देरी तो दूसरी वजह है वायुसेना के पास मिग 21 के विकल्प के तौर दूसरा कोई विमान मौजूद नहीं है।

सालों से भारतीय वायुसेवा को आधुनिक मारक क्षमता वाले लड़ाकू विमानों की दरकार है। लेकिन पूर्व की सरकारों की उदासीनता के कारण वायु सेवा की बेबसी साफ नजर आती है जो वायुसेना प्रमुख के शब्दों से पता लगता है। लेकिन इस विपरीत परिस्थिति में भी वायुसेना ने कभी हार नहीं मानी और ना उसे अपनी कमजोरी बनने दिया। बल्कि इन अभावों के बावजूद भारतीय वायुसेना पूरे दमखम के साथ कई मोर्चें पर ना केवल सीमाओं की हिफाजत करती है बल्कि दुश्मन की चुनौतियों का जवाब भी देती है। खुद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भारतीय वायु सेना की शान में कसीदे पढञने से खुद को रोक नहीं सके। बालाकोट हमले का नाम लेकर  राजनाथ सिंह ने कहा कि “ भारतीय वायु सेना एक पेशेवर एयरफोर्स है और बालाकोट के बाद दुनिया भी उसका लोहा मानती है।

वायुसेना प्रमुख धनोआ ने ये तमाम बातें दिल्ली में एयरफोर्स औडिटोरियम  में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के मौजूदगी में कही। ये लोग वायुसेना के आधुनिकीकरण और स्वदेशीकरण को सीआईआई और सोसाइटी ऑफ डिफेंस मैन्युफैकचरर्रस के कार्यक्रम में शिरकत कर रहे थे। भारतीय वायु सेना के साथ मिग 21 के इतिहास पर नजर डालें तो 1963 के बाद से  करीब 1200 मिग 21 विमान भारतीय वायु सेवा ने अपने बेड़े में शामिल किया है। जिसमें अब केवल 113 मिग 21 विमान ही बचे हैं। पुराने हो चुके मिग 21 विमानों को सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है। अब तक वायुसेना का  करीब 600 से ज्यादा मिग21 लड़ाकू विमान हादसे का शिकार हो चुका है। जिसमें 100 से ज्यादा पायलट्स की जान जा चुकी है। भारतीय वायुसेना को अपनी ताकत को बरकरार रखने के लिये करीब 42 स्कावड्रन की जरुरत है लेकिन मौजूदा समय में उसके पास केवल  31 स्कावड्रन ही बचे हैं। भारत ने फ्रांस के साथ 36 रफाल लड़ाकू विमान को खऱीदने का समझौता किया है, जिसमें से पहला रफाल विमान अगले महीने सितंबर में भारत को डिलिविरी मिलेगी। पूरे 36 विमानों की डिलिविरी 2022 में जाकर पूरी होगी। 

हालाकि हाल ही में भारतीय वायु सेना ने 114 लड़ाकू विमान खरीदने के लिये टेंडर जारी किया है।  वायुसेना प्रमुख को आज कहना पड़ा कि, पांचवें जेनरेशन के लड़ाकू विमान हमारे देश की बड़ी जरुरत है और इसे हासिल करने के लिये हम किसी युद्ध का इंतजार नहीं कर सकते।दरअसल भारत में हमारे सेनाओं के रक्षा जरुरतों के खऱीद में सालों और दशकों लग जाते हैं। रफाल डील इसका बड़ा उदाहरण है 2007 से रफाल विमान खरीदने की प्रक्रिया शुरु हुई लेकिन रफाल निमान खरीदने के लिये भारत फ्रांस के बीच करार साल 2016 में जाकर हुआ यानि पूरे 9 साल की देरी। इस देरी का खामियाजा हमारे सेनाओं के तीनों अंगो को उठाना पड़ता रहा है। और ये हालात तब है जब भारत के ओर पाकिस्तान तो दूसरी ओर चीन की सीमा लगती है और इन दोनों ही देशों के साथ भारत का युद्ध हो चुका है।